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मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा सितंबर महीने में कमजोर होता नजर आ रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹14,474 करोड़ की निकासी कर ली है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल को बाजार में इस बिकवाली की बड़ी वजह माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच विदेशी निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालने की रणनीति अपना रहे हैं। भारत जैसे उभरते बाजारों पर इसका असर देखने को मिल रहा है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है।
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाएं पैदा हुई हैं, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। भारत दुनिया के बड़े कच्चा तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश की महंगाई, कंपनियों की लागत और बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है। निवेशक इसी जोखिम को देखते हुए सतर्क रुख अपना रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल कीमतों, परिवहन खर्च और कई उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ सकती है।
शेयर बाजार में बढ़ी अस्थिरता
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। निवेशक अब कंपनियों के प्रदर्शन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी नजर बनाए हुए हैं। हाल के दिनों में बाजार में गिरावट का दबाव देखने को मिला, खासकर उन सेक्टरों में जिन पर महंगे तेल और वैश्विक जोखिमों का ज्यादा असर पड़ सकता है।
घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा
जहां विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में खरीदारी जारी रखकर कुछ संतुलन बनाए रखा है। भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने गिरावट के असर को सीमित करने में मदद की है।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों के रुख पर रहेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल सितंबर महीने में FPI की ₹14,474 करोड़ की निकासी ने बाजार को सतर्क कर दिया है। निवेशक अब वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों के आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।
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