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पजेशन में देरी का असर बिल्डर पर लगा ब्याज का बड़ा जुर्माना

Ratna Netam
27 Sept 2026 9:28 PM IST
पजेशन में देरी का असर बिल्डर पर लगा ब्याज का बड़ा जुर्माना
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बिजनेस : घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का एक बड़ा सपना होता है। लोग अपनी मेहनत की कमाई लगाकर वर्षों तक इंतजार करते हैं कि उन्हें उनका अपना घर मिल सके। लेकिन कई बार प्रोजेक्ट में देरी, निर्माण कार्य में रुकावट या बिल्डर की लापरवाही के कारण खरीदारों को तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों में कानून घर खरीदारों को राहत देने का काम करता है।हाल ही में एक मामले में फ्लैट की पजेशन में देरी बिल्डर पर भारी पड़ गई। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने होमबायर्स के पक्ष में फैसला देते हुए बिल्डर को देरी की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। आदेश के तहत बिल्डर को करीब 7.1 लाख रुपये ब्याज के रूप में देने होंगे।
पजेशन में देरी पर खरीदार ने उठाई आवाज
मामला एक ऐसे होमबायर से जुड़ा है, जिसने तय समय के अनुसार अपने फ्लैट का कब्जा मिलने की उम्मीद की थी। खरीदार ने बिल्डर की परियोजना में फ्लैट बुक किया था और इसके लिए निर्धारित भुगतान भी किया गया था।खरीदार को उम्मीद थी कि तय समय सीमा में उसे घर का कब्जा मिल जाएगा, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी के कारण पजेशन समय पर नहीं दिया गया। लंबे इंतजार के बाद खरीदार ने इस मामले को संबंधित उपभोक्ता आयोग के सामने रखा।होमबायर का तर्क था कि फ्लैट की डिलीवरी में देरी के कारण उसे आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उसने बिल्डर से देरी की अवधि के लिए मुआवजे और ब्याज की मांग की।
आयोग ने बिल्डर को ठहराया जिम्मेदार
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता है तो खरीदार को होने वाली परेशानी के लिए बिल्डर जिम्मेदार हो सकता है।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि घर खरीदार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हुए भुगतान किया, लेकिन बिल्डर तय समय पर सेवा देने में सफल नहीं रहा। ऐसे में खरीदार को राहत मिलनी चाहिए।फैसले के अनुसार, बिल्डर को देरी की अवधि के लिए ब्याज के रूप में 7.1 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
होमबायर्स के लिए महत्वपूर्ण फैसला
रियल एस्टेट सेक्टर में पजेशन में देरी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। कई खरीदार वर्षों तक अपने घर का इंतजार करते हैं और इस दौरान उन्हें किराया, लोन की ईएमआई और अन्य खर्चों का सामना करना पड़ता है।ऐसे मामलों में उपभोक्ता आयोग के फैसले खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करते हैं। यह संदेश भी जाता है कि बिल्डर को परियोजना की समयसीमा और खरीदारों से किए गए वादों का पालन करना होगा।
घर खरीदने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लैट खरीदने से पहले खरीदारों को प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारियों की जांच करनी चाहिए। इसमें बिल्डर का रिकॉर्ड, प्रोजेक्ट की मंजूरी, निर्माण की स्थिति और डिलीवरी की समय सीमा शामिल है।खरीदारों को बुकिंग से पहले एग्रीमेंट की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासतौर पर पजेशन की तारीख, देरी होने पर मुआवजे और अन्य नियमों को समझना जरूरी होता है।इसके अलावा भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में खरीदार अपने अधिकारों की रक्षा कर सके।
रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ी जवाबदेही
रियल एस्टेट रेगुलेशन कानून (RERA) लागू होने के बाद घर खरीदारों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब खरीदार प्रोजेक्ट में देरी या अन्य समस्याओं को लेकर संबंधित प्राधिकरणों में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।बिल्डरों के लिए भी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और खरीदारों को तय समय पर कब्जा देना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन गई है।
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