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IMF : भारत में गरीबी खत्म, महामारी में सरकारी राशन ने की मदद

Rani Sahu
7 April 2022 3:42 PM IST
IMF : भारत में गरीबी खत्म, महामारी में सरकारी राशन ने की मदद
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नए वर्किंग पेपर में कहा गया है

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नए वर्किंग पेपर में कहा गया है कि भारत ने सरकारी खाद्य योजनाओं के जरिए लगभग बेहद गरीबी (Extreme Poverty) को मिटा दिया है और अपनी खपत (Consumption) में असमानता को 40 सालों के सबसे निचले स्तर पर ला दिया है. आईएमएफ के वर्किंग पेपर को अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला, अरविंद विरमानी और करण भसीन ने पब्लिश किया है. इसमें कहा गया है कि बेहद गरीबी में जीवन बिता रहे लोगों का अनुपात एक फीसदी से कम स्तर पर बना रहा है. यह महामारी (Pandemic) के दौरान भी इस स्तर पर स्थिर रहा है. इसके पीछे वजह राशन को बताया गया है. यह स्टडी ऐसे समय पर सामने आई है, जब हाल ही में आईं ग्लोबल रिपोर्ट्स में इस बात की ओर संकेत किया गया है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अमीर और गरीब के बीच अंतर बढ़ रहा है, जबकि कोविड-19 महामारी के आर्थिक झटकों पर रिपोर्ट्स में अलग-अलग निष्कर्ष निकाले गए हैं.

5 अप्रैल 2022 को पब्लिश हुए आईएमएफ के पेपर में कहा गया है कि भारत में बेहद ज्यादा गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या महामारी से पहले साल 2019 में आबादी की 0.8 फीसदी थी.
बेहद गरीबी के लिए विश्व बैंक की परिभाषा
बेहद गरीब लोगों के लिए विश्व बैंक ने परिभाषित किया है कि 1.9 अमेरिकी डॉलर या कम की पर्चेजिंग पावर पैरिटी (PPP) में आने वाले लोग इस कैटेगरी में आते हैं.
स्टडी में कहा गया है कि राशन यह सुनिश्चित करने में अहम रहा कि महामारी के साल 2020 में बेहद गरीबी नहीं बढ़े और कम स्तर पर बनी रहे. पीपीपी एक मापदंड है, जो अलग-अलग करेंसी की खरीदने की शक्ति को बराबर करता है, जिससे तुलना में आसानी हो.
स्टडी में निष्कर्ष पाया गया है कि उनके नतीजे दिखाते हैं कि भारत के खाद्य सब्सिडी कार्यक्रम में मिली सामाजिक सुरक्षा ने महामारी के असर के बड़े हिस्से को खत्म कर दिया. इसके मुताबिक, इस तरह बार-बार कम गरीबी दर से पता चलता है कि भारत ने बेहद गरीबी को खत्म कर दिया है.
इसके अलावा आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल ही में कहा था कि कोविड-19 संकट के बावजूद भारत को बीते कुछ वर्षों में रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है और पूंजीगत प्रवाह के जोखिम को कम करने के लिए भारत में कुछ सुरक्षा उपाय हैं.
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