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फिटमेंट फैक्टर ने फिर किया कमाल तो कर्मचारियों की कितनी बढ़ेगी तनख्वाह
Ratna Netam
29 Sept 2026 8:45 PM IST

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बिजनेस : 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। सवाल यह है कि अगर 8वें वेतन आयोग में भी 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कितनी बढ़ सकती है। हालांकि अभी 8वें वेतन आयोग के लिए किसी अंतिम फिटमेंट फैक्टर की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए 2.57 के आधार पर होने वाली गणना फिलहाल सिर्फ एक उदाहरण है, न कि तय वेतन संशोधन।7वें वेतन आयोग में सरकार ने सभी स्तरों के लिए 2.57 का समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, नई बेसिक पे तय करने के लिए कर्मचारी की पुरानी बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा किया गया था। इसी आधार पर 6वें वेतन आयोग की न्यूनतम बेसिक पे 7,000 रुपये से बढ़कर 7वें वेतन आयोग में 18,000 रुपये हुई थी।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है, जिसके जरिए पुराने वेतनमान से नए वेतनमान में कर्मचारी की बेसिक सैलरी तय की जाती है। आसान शब्दों में कहें तो अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय होता है, तो नई बेसिक पे का शुरुआती गणित होगा:
30,000 × 2.57 = 77,100 रुपये।
इसी तरह 40,000 रुपये की बेसिक पे होने पर:
40,000 × 2.57 = 1,02,800 रुपये।
यानी केवल बेसिक पे के स्तर पर 2.57 का फैक्टर मौजूदा बेसिक को 157 प्रतिशत अधिक कर देता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी के हाथ में आने वाली कुल सैलरी भी 157 प्रतिशत बढ़ जाएगी।
18,000 रुपये बेसिक वालों का क्या होगा?
अगर वर्तमान न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये मानें और 8वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू हो जाए, तो गणना होगी:
18,000 × 2.57 = 46,260 रुपये।
यानी न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 46,260 रुपये हो सकती है।लेकिन यह केवल काल्पनिक गणना है। 8वें वेतन आयोग ने अभी 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी नहीं दी है। अंतिम संख्या आयोग की सिफारिश और उसके बाद सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगी।
25,000 रुपये बेसिक पर कितना असर?
अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है, तो 2.57 के आधार पर नई बेसिक पे होगी:
25,000 × 2.57 = 64,250 रुपये।
इस तरह बेसिक पे में 39,250 रुपये का अंतर दिखाई देगा।
35,000 रुपये बेसिक वालों का गणित
अगर मौजूदा बेसिक सैलरी 35,000 रुपये है तो:
35,000 × 2.57 = 89,950 रुपये।
यानी नई बेसिक पे करीब 90 हजार रुपये के आसपास पहुंच सकती है।
50,000 रुपये बेसिक पर कितना बदलाव?
50,000 रुपये की मौजूदा बेसिक सैलरी पर 2.57 का फैक्टर लगाने पर:
50,000 × 2.57 = 1,28,500 रुपये।
इस उदाहरण में नई बेसिक पे 1.28 लाख रुपये से अधिक हो जाएगी।
क्या इन-हैंड सैलरी भी इतनी ही बढ़ेगी?
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम होता है। फिटमेंट फैक्टर सीधे बेसिक पे पर लागू होता है, पूरी ग्रॉस या इन-हैंड सैलरी पर नहीं। ग्रॉस सैलरी में बेसिक के साथ DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्ते भी शामिल होते हैं।
नया वेतन आयोग लागू होने के समय आमतौर पर पुराने DA को नए बेसिक वेतन में समाहित कर दिया जाता है और DA फिर शून्य से शुरू होता है। इसके अलावा HRA और दूसरे भत्तों की गणना नए नियमों के आधार पर हो सकती है। इसी वजह से बेसिक पे 2.57 गुना होने का अर्थ यह नहीं है कि ग्रॉस सैलरी भी 2.57 गुना हो जाएगी। हाल की उदाहरणात्मक गणनाओं में भी अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर ग्रॉस सैलरी की बढ़ोतरी बेसिक पे की बढ़ोतरी से काफी कम दिखाई गई है।
DA का क्या होगा?
नए वेतन आयोग के लागू होने पर सबसे बड़ा असर महंगाई भत्ते यानी DA पर पड़ता है। मौजूदा DA पुराने बेसिक वेतन से जुड़ा होता है। जब नया बेसिक वेतन तय होता है तो मौजूदा DA को समायोजित किया जा सकता है और नई व्यवस्था में DA फिर से बढ़ना शुरू करता है।इसी वजह से कर्मचारी को केवल पुराने बेसिक और नए बेसिक की तुलना करके वास्तविक सैलरी वृद्धि नहीं निकालनी चाहिए।
पेंशनरों पर भी पड़ेगा असर
फिटमेंट फैक्टर का असर केवल मौजूदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता। पिछले वेतन आयोग में इसका इस्तेमाल पेंशन संशोधन के लिए भी किया गया था। इसलिए 8वें वेतन आयोग का अंतिम फिटमेंट फैक्टर पेंशनरों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगा। 7वें वेतन आयोग में वेतन और पेंशन संशोधन के लिए 2.57 का फैक्टर लागू किया गया था।
क्या 2.57 ही तय होगा?
फिलहाल इसका जवाब नहीं है। मीडिया और कर्मचारी संगठनों की ओर से 2.0, 2.10, 2.28, 2.57, 2.66 और इससे अधिक तक अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। लेकिन इनमें से किसी को भी सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। कुछ कर्मचारी संगठनों ने अधिक फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की भी मांग की है।इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों से सावधान रहना जरूरी है जिनमें किसी खास फिटमेंट फैक्टर को पहले ही तय बताया जा रहा है।
2.57 के हिसाब से आसान उदाहरण
अगर 7वें वेतन आयोग वाला 2.57 का फैक्टर दोबारा लागू हुआ तो अनुमानित बेसिक पे कुछ इस तरह हो सकती है:
18,000 रुपये → 46,260 रुपये
25,000 रुपये → 64,250 रुपये
30,000 रुपये → 77,100 रुपये
35,000 रुपये → 89,950 रुपये
40,000 रुपये → 1,02,800 रुपये
50,000 रुपये → 1,28,500 रुपये
ये आंकड़े केवल मौजूदा बेसिक पे को 2.57 से गुणा करके निकाले गए हैं। इनमें HRA, DA, TA, deductions या अन्य भत्ते शामिल नहीं हैं।कुल मिलाकर अगर 8वें वेतन आयोग में 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है। लेकिन वास्तविक ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह नए भत्तों, DA, HRA, पे मैट्रिक्स और सरकार द्वारा स्वीकार की जाने वाली अंतिम सिफारिशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल 2.57 को केवल एक उदाहरण मानकर ही वेतन का गणित समझना सही होगा।
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