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पुरानी कार-बाइक में E20 पेट्रोल से क्या होगा असर? सरकार ने दी जानकारी

Ratna Netam
22 July 2026 4:42 PM IST
पुरानी कार-बाइक में E20 पेट्रोल से क्या होगा असर? सरकार ने दी जानकारी
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New Delhi नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बुधवार को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 पेट्रोल को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकार ने कहा है कि जिन पुराने वाहनों को E10 पेट्रोल के इस्तेमाल के हिसाब से डिजाइन किया गया था, उनमें E20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन दक्षता यानी माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण बड़े स्तर पर इंजन खराब होने या वाहनों में गंभीर तकनीकी समस्या आने का कोई प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।

राज्यसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है, जबकि पहले इस्तेमाल होने वाले E10 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 10 प्रतिशत तक होती थी। एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कुछ पुराने वाहनों के प्रदर्शन पर हल्का असर पड़ सकता है।

मंत्री ने बताया कि E10 पेट्रोल के लिए तैयार किए गए पुराने वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में होने वाली कमी सामान्य तौर पर करीब 3 से 5 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। इसका मुख्य कारण एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होना है। हालांकि, यह कमी इतनी बड़ी नहीं है कि वाहन चलाने वालों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़े।

सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल को लेकर वाहन निर्माताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है और नए वाहनों को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि वे एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। देश में धीरे-धीरे E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है।

एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इससे जहां एक ओर किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर देश में पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर होने वाले खर्च को कम करने में भी मदद मिल सकती है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है।

सरकार ने यह भी कहा कि अब तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन में बड़े पैमाने पर खराबी आने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वाहन कंपनियां भी नए मॉडल को E20 अनुकूल बनाकर बाजार में उतार रही हैं। इसके अलावा पुराने वाहनों के मालिकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे अपने वाहन की सर्विसिंग नियमित रूप से कराते रहें और कंपनी की गाइडलाइन का पालन करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, E20 पेट्रोल का इस्तेमाल आने वाले समय में देश की ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा बन सकता है। हालांकि पुराने वाहनों में माइलेज में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसका असर सामान्य उपयोग में बहुत अधिक नहीं होगा। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल को लेकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरावट संभव है, लेकिन इंजन खराब होने जैसी बड़ी समस्याओं का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा वाहन E20 ईंधन के अनुरूप तैयार किए जाएंगे।

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