NPS में पैसा लगाना कितना सुरक्षित, रिटायरमेंट से पहले जानें हर जरूरी बात

New Delhi नई दिल्ली : नई दिल्ली, 12 जुलाई 2026। आज के दौर में केवल बचत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहना भी जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की शुरुआत 1 जनवरी 2004 को की थी। यह एक लंबी अवधि की रिटायरमेंट निवेश योजना है, जिसका लक्ष्य लोगों को बुढ़ापे में नियमित आय उपलब्ध कराना है।
शुरुआत में एनपीएस केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसमें 18 से 70 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। नौकरीपेशा लोगों के अलावा कारोबारी, स्वरोजगार करने वाले लोग और एनआरआई भी निर्धारित नियमों के तहत इसमें खाता खोल सकते हैं।
क्या है NPS और कैसे करता है काम?
नेशनल पेंशन सिस्टम एक मार्केट लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम है। इसमें निवेशक अपनी क्षमता के अनुसार नियमित रूप से पैसा जमा करता है। यह रकम अलग-अलग निवेश विकल्पों जैसे शेयर बाजार, सरकारी प्रतिभूतियों, कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य साधनों में लगाई जाती है।
एनपीएस में निवेशक को दो विकल्प मिलते हैं। पहला है कि वह खुद अपने निवेश का एसेट एलोकेशन तय करे और दूसरा है ऑटो चॉइस, जिसमें उम्र के अनुसार निवेश का अनुपात अपने आप बदलता रहता है।
जब निवेशक 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तो वह जमा राशि का एक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकता है। वहीं, बाकी राशि से एन्युटी खरीदनी होती है, जिसके आधार पर हर महीने पेंशन प्राप्त होती है।
कितना निवेश करना होता है?
एनपीएस टियर-1 खाते में खाता खोलने के लिए न्यूनतम 500 रुपये जमा करने होते हैं। इसके बाद पूरे वित्त वर्ष में कम से कम 1000 रुपये का निवेश जरूरी होता है। निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, तिमाही या सालाना निवेश कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाता है, उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होने की संभावना बढ़ जाती है। लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा निवेश को बढ़ाने में मदद करता है।
NPS में कितना मिलता है रिटर्न?
एनपीएस में बैंक एफडी की तरह निश्चित ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह बाजार आधारित योजना है। इसका रिटर्न चुने गए पेंशन फंड और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
पिछले वर्षों में कई एनपीएस फंडों ने औसतन करीब 9 से 12 प्रतिशत सालाना तक का रिटर्न दिया है। हालांकि भविष्य में मिलने वाला रिटर्न बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
टैक्स बचाने का भी मिलता है लाभ
एनपीएस को रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ-साथ टैक्स सेविंग का अच्छा विकल्प भी माना जाता है। इसमें निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80CCD(1) के तहत टैक्स छूट मिलती है।
इसके अलावा धारा 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50 हजार रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है। वहीं, नौकरी देने वाली संस्था के योगदान पर धारा 80CCD(2) के तहत अलग से टैक्स लाभ मिलता है।
60 साल बाद कैसे मिलता है पैसा?
रिटायरमेंट की उम्र यानी 60 वर्ष पूरी होने पर निवेशक अपने कुल जमा फंड का 60 प्रतिशत तक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकता है। बाकी कम से कम 40 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना जरूरी होता है।
एन्युटी के माध्यम से निवेशक को हर महीने पेंशन मिलती है। हालांकि पेंशन की राशि चुनी गई योजना और उस समय की ब्याज दरों पर निर्भर करती है।
क्या 60 साल से पहले पैसा निकाल सकते हैं?
एनपीएस पूरी तरह लॉक-इन योजना नहीं है। कुछ विशेष परिस्थितियों में निवेशक तीन वर्ष पूरे होने के बाद अपने योगदान का 25 प्रतिशत तक पैसा निकाल सकता है।
यह सुविधा बच्चों की शिक्षा, शादी, घर खरीदने, घर बनाने और गंभीर बीमारी जैसी जरूरतों के लिए दी जाती है।
अगर कोई व्यक्ति 60 वर्ष से पहले एनपीएस से बाहर निकलना चाहता है तो सामान्य स्थिति में केवल 20 प्रतिशत राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है, जबकि 80 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदनी होती है।
किन लोगों के लिए फायदेमंद है NPS?
विशेषज्ञों का कहना है कि एनपीएस उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो लंबी अवधि तक नियमित निवेश करना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं।
हालांकि इसमें बाजार जोखिम भी जुड़ा हुआ है और रिटायरमेंट से पहले पूरी राशि निकालने की सुविधा सीमित है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी आय, जरूरत और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
एनपीएस अनुशासित निवेश के जरिए भविष्य के लिए बड़ा फंड तैयार करने और रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का साधन बनाने में मदद कर सकता है।





