PF खाते में जमा पैसे पर कितना मिलेगा ब्याज? सरकार ने बताया

नई दिल्ली : सरकारी कर्मचारियों के लिए जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए GPF की ब्याज दर घोषित कर दी है। सरकार ने इस बार भी ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे पहले की तरह 7.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Budget Division) ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया है। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक जनरल प्रोविडेंट फंड और इससे जुड़े अन्य फंड पर 7.1 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर लागू रहेगी।
वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि आम जानकारी के लिए यह घोषणा की जाती है कि वर्ष 2026-27 के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और इसी तरह के अन्य फंड के सब्सक्राइबर्स के खातों में जमा राशि पर 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है क्योंकि सरकार ने ब्याज दर में कटौती नहीं की है।
किन फंड पर लागू होगी नई दर?
सरकार की ओर से घोषित 7.1 प्रतिशत ब्याज दर केवल GPF तक सीमित नहीं है। यह दर कई अन्य सरकारी भविष्य निधि योजनाओं पर भी लागू होगी। इनमें कॉन्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड (CPF), ऑल इंडिया सर्विसेज प्रोविडेंट फंड और सरकारी संस्थानों द्वारा संचालित अन्य समान फंड शामिल हैं।
GPF सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान अपनी सैलरी का एक हिस्सा जमा करते हैं। यह राशि कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय एक बड़ी वित्तीय सहायता के रूप में मिलती है।
रिटायरमेंट के लिए बड़ा सहारा है GPF
जनरल प्रोविडेंट फंड सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय की बचत का माध्यम है। इसमें कर्मचारी नियमित रूप से योगदान करते हैं और सरकार इस जमा राशि पर तय ब्याज देती है। नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी को जमा राशि और उस पर मिला ब्याज एक साथ प्राप्त होता है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए GPF इसलिए भी खास है क्योंकि यह सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं होता और ब्याज दर सरकार द्वारा तय की जाती है।
PPF के बराबर है GPF की ब्याज दर
मौजूदा समय में GPF और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) दोनों की ब्याज दर 7.1 प्रतिशत चल रही है। हालांकि दोनों योजनाओं में बड़ा अंतर है। GPF केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होता है, जबकि PPF आम नागरिकों के लिए एक स्वैच्छिक निवेश योजना है।
PPF खाता कोई भी व्यक्ति बैंक या डाकघर के माध्यम से खोल सकता है। इसमें न्यूनतम 500 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है। PPF का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है और इसमें लंबी अवधि के लिए सुरक्षित बचत का विकल्प मिलता है।
वहीं, GPF में सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान योगदान करते हैं और रिटायरमेंट के समय इसका लाभ प्राप्त करते हैं।
सरकार द्वारा GPF की ब्याज दर को 7.1 प्रतिशत पर बनाए रखने से लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े लोगों को फायदा मिलेगा। ब्याज दर में बदलाव नहीं होने से कर्मचारियों की भविष्य निधि पर मिलने वाला रिटर्न पहले की तरह जारी रहेगा।





