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भारतीय शेयर बाजार में व्यापक निवेश का विकल्प
मुंबई: HDFC म्यूचुअल फंड ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर अपना 'HDFC FTSE इंडिया इक्विटी ETF' लिस्ट किया है। इससे निवेशकों को एक ही इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट के जरिए कई भारतीय कंपनियों में निवेश करने का नया मौका मिला है।
इस लिस्टिंग के मौके पर 16 अक्टूबर, 2026 को मुंबई में NSE में एक 'बेल-रिंगिंग' (घंटी बजाने की) सेरेमनी आयोजित की गई।
ETF पूरे भारतीय बाजार को कवर करता है
'HDFC FTSE इंडिया इक्विटी ETF' एक ओपन-एंडेड इन्वेस्टमेंट स्कीम है, जो 'FTSE इंडिया इक्विटी इंडेक्स (TRI)' को ट्रैक करती है। यह इंडेक्स 'FTSE इंडिया ऑल कैप इंडेक्स' के मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। इससे निवेशकों को भारत के लिस्टेड इक्विटी मार्केट के एक बड़े हिस्से में निवेश करने का मौका मिलता है। यह स्कीम एक नियम-आधारित (rules-based) इन्वेस्टमेंट अप्रोच अपनाती है, जिससे निवेशक एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के जरिए भारत की दीर्घकालिक (long-term) आर्थिक वृद्धि में हिस्सा ले सकते हैं।
लिस्टिंग सेरेमनी में शीर्ष अधिकारी शामिल हुए
इस सेरेमनी में HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नवनीत मुनोट, FTSE रसेल के एशिया प्रमुख निको बौले, और NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीष कुमार चौहान शामिल हुए। वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत के कैपिटल मार्केट के बढ़ते महत्व और डायवर्सिफाइड इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग पर जोर दिया।
दीर्घकालिक वृद्धि पर फोकस
नवनीत मुनोट ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के कैपिटल मार्केट में काफी बदलाव आए हैं। उन्होंने बाजार की वृद्धि को समर्थन देने वाले मुख्य कारकों के रूप में 'इकोनॉमिक फॉर्मलाइजेशन' (अर्थव्यवस्था का औपचारिक होना), विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी और निवेशकों की बढ़ती रुचि का जिक्र किया।
मुनोट के अनुसार, निवेशक अब ऐसे पारदर्शी इन्वेस्टमेंट विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जो उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश करने का मौका दें। यह ETF एक अनुशासित इन्वेस्टमेंट रणनीति के जरिए इसी मांग को पूरा करने का लक्ष्य रखता है।
पैसिव इन्वेस्टमेंट विकल्पों का विस्तार
इस लिस्टिंग से HDFC म्यूचुअल फंड के पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का दायरा और मजबूत हुआ है। यह फंड अपने बेंचमार्क के अनुरूप रिटर्न देने का प्रयास करता है (खर्चों को घटाने से पहले), हालांकि इसमें 'ट्रैकिंग डिफरेंस' (ट्रैकिंग में अंतर) हो सकता है। इस स्कीम में निवेश का जोखिम काफी अधिक है, क्योंकि यह इक्विटी में निवेश करती है। निवेशकों को निवेश का फैसला लेने से पहले स्कीम से जुड़े दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।
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