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खाड़ी संकट का असर: गेल ने येलाहांका पावर प्लांट को गैस सप्लाई रोकी, बिजली उत्पादन हो सकता है प्रभावित

jantaserishta.com
12 March 2026 3:55 PM IST
खाड़ी संकट का असर: गेल ने येलाहांका पावर प्लांट को गैस सप्लाई रोकी, बिजली उत्पादन हो सकता है प्रभावित
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बेंगलुरु: सरकारी महारत्न कंपनी गेल यानी गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (जीएआईएल) ने गुरुवार को सुबह 6 बजे से बेंगलुरु के येलाहांका गैस आधारित पावर प्लांट को प्राकृतिक गैस की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी है। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) द्वारा स्थापित 370 मेगावाट क्षमता वाला येलाहांका पावर प्लांट राज्य का एकमात्र गैस आधारित बिजली उत्पादन संयंत्र है। अधिकारियों ने बताया कि गैस सप्लाई रुकने से इसके बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
यह पावर प्लांट मुख्य रूप से बेंगलुरु शहर को बिजली आपूर्ति के लिए बनाया गया था, और यह पिछले साल दिसंबर से लगातार काम कर रहा है। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पैदा हुई प्राकृतिक गैस की कमी से अब यहां बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण देश भर में गैस की कमी हो गई है, जिसके चलते केंद्र सरकार ने गैस आपूर्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों की प्राथमिकता तय की है। इससे कर्नाटक में बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण देश भर में एलपीजी और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर प्राकृतिक गैस के आवंटन में प्राथमिकता तय की है।
इस सूची में घरेलू खपत को सबसे ऊपर रखा गया है, जबकि परिवहन और उर्वरक (फर्टिलाइजर) क्षेत्र को अगली प्राथमिकता दी गई है। वहीं, बिजली उत्पादन क्षेत्र को सबसे निचली प्राथमिकता में रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि बिजली की अधिक मांग के दौरान आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्य सरकार सभी उपलब्ध स्रोतों से बिजली उत्पादन कर रही है।
वर्तमान में कर्नाटक में प्रतिदिन करीब 35.5 करोड़ यूनिट बिजली की मांग है, जिसे थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट, सौर और पवन ऊर्जा तथा केंद्रीय ग्रिड से मिलने वाली बिजली के जरिए पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के साथ पावर एक्सचेंज व्यवस्था के जरिए भी कुछ बिजली हासिल कर रहा है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अगर येलाहांका पावर प्लांट को गैस सप्लाई और कम हुई, तो बिजली आपूर्ति में हल्की बाधा आ सकती है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के तहत केंद्र सरकार ने मौजूदा एलपीजी संकट से निपटने के लिए गैस आवंटन के लिए प्राथमिक क्षेत्र तय किए हैं।
इसमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी), एलपीजी उत्पादन, परिवहन के लिए सीएनजी और पाइपलाइन संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 100 प्रतिशत गैस आवंटन मिलेगा।
उर्वरक संयंत्रों को दूसरी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है और उन्हें इस अवधि की औसत खपत का करीब 70 प्रतिशत गैस प्राप्त होगा। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता, जिनमें चाय निर्माता भी शामिल हैं, तीसरी प्राथमिकता श्रेणी में रखे गए हैं। वहीं सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां, जो उद्योग और व्यापार को गैस सप्लाई करती हैं, चौथी प्राथमिकता में हैं। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80 प्रतिशत गैस मिलेगा।
चूंकि बिजली उत्पादन को सबसे कम प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा गया है, इसलिए जब तक प्राकृतिक गैस की कमी दूर नहीं होती, तब तक इस क्षेत्र को गैस सप्लाई सीमित रहने की संभावना है।
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