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भारत का ग्रीन हाइड्रोजन हब बन सकता है गुजरात रिपोर्ट में सामने आई बड़ी ताकत
Ratna Netam
25 Sept 2026 3:34 PM IST

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अहमदाबाद। गुजरात भारत में रिन्यूएबल यानी ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और विकास के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। S&P ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की बड़ी रिफाइनरी और अमोनिया उत्पादन क्षमता, सौर और पवन ऊर्जा के विशाल संसाधन, मजबूत बंदरगाह नेटवर्क और राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीति भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गुजरात में प्रस्तावित ज्यादातर बड़े हाइड्रोजन प्रोजेक्ट अभी संभाव्यता यानी फिजिबिलिटी के चरण में हैं।S&P ग्लोबल की 'Gujarat Green Hydrogen: Turning an Ambition into Reality' रिपोर्ट में गुजरात की उन संरचनात्मक खूबियों का विश्लेषण किया गया है, जो राज्य को लंबी अवधि में रिन्यूएबल हाइड्रोजन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद कर सकती हैं। रिपोर्ट में भारत को वैश्विक रिन्यूएबल हाइड्रोजन उद्योग के विकास और भविष्य के विस्तार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में देखा गया है।
S&P ग्लोबल के मुताबिक गुजरात इस क्षेत्र में खास स्थिति में है क्योंकि राज्य के पास पहले से ही बड़े पैमाने पर औद्योगिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचा मौजूद है। रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल और उर्वरक उद्योगों की मजबूत मौजूदगी ग्रीन हाइड्रोजन के लिए शुरुआती घरेलू मांग तैयार कर सकती है। इसके साथ ही राज्य के बंदरगाह भविष्य में हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल रिफाइनरी क्षमता का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा गुजरात में मौजूद है। इसी तरह देश की अमोनिया उत्पादन क्षमता में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। ये दोनों उद्योग हाइड्रोजन की बड़ी मात्रा में खपत करते हैं। ऐसे में पारंपरिक हाइड्रोजन के स्थान पर रिन्यूएबल हाइड्रोजन का इस्तेमाल बढ़ने की स्थिति में गुजरात को पहले से मौजूद औद्योगिक मांग का लाभ मिल सकता है।
ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक सस्ती और पर्याप्त रिन्यूएबल बिजली है। इस मोर्चे पर भी गुजरात की स्थिति मजबूत बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सौर और पवन ऊर्जा की संयुक्त क्षमता करीब 50 गीगावाट है। आने वाले वर्षों में इसमें और विस्तार होने की संभावना है। बड़ी मात्रा में उपलब्ध रिन्यूएबल बिजली इलेक्ट्रोलाइज़र के जरिए पानी से हाइड्रोजन बनाने की लागत को प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।गुजरात की लंबी समुद्री तटरेखा और विकसित बंदरगाह नेटवर्क भी राज्य को अतिरिक्त बढ़त देता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के समुद्री व्यापार का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा गुजरात स्थित बंदरगाहों के माध्यम से होता है। यह बुनियादी ढांचा भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और दूसरे संबंधित उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मददगार हो सकता है।
इन सभी कारकों की वजह से गुजरात के पास ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से लेकर उसके इस्तेमाल, परिवहन और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की संभावना है। राज्य में पहले से मौजूद रिफाइनरी और उर्वरक उद्योग घरेलू मांग पैदा कर सकते हैं, जबकि बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच उपलब्ध करा सकते हैं।रिपोर्ट में गुजरात सरकार की हाइड्रोजन रणनीति का भी उल्लेख किया गया है। राज्य के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने दिसंबर 2025 में अपनी हाइड्रोजन रणनीति को अंतिम रूप दिया था। इसमें उत्पादन से जुड़े लक्ष्य निर्धारित करने के साथ शुरुआती परियोजनाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रोत्साहन का ढांचा तैयार किया गया है।
इस रणनीति के तहत गुजरात में स्थापित होने वाली शुरुआती 500 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता को विभिन्न प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। इलेक्ट्रोलाइज़र ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की प्रमुख तकनीक है, जिसमें रिन्यूएबल बिजली का इस्तेमाल कर पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है।राज्य की नीति में पात्र इलेक्ट्रोलाइज़र कंपोनेंट्स के लिए कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, ऑक्सीजन कलेक्शन से जुड़ी सुविधाओं और पानी को खारापन-मुक्त करने वाली डीसेलिनेशन इकाइयों को भी सहायता के दायरे में रखा गया है। इससे शुरुआती परियोजनाओं की पूंजीगत लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
समुद्र के पास प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए डीसेलिनेशन सुविधाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया में पानी की जरूरत होती है और तटीय क्षेत्रों में समुद्री पानी का उपचार कर उसका इस्तेमाल करने से मीठे पानी के स्रोतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।हालांकि गुजरात के पक्ष में कई मजबूत कारक मौजूद होने के बावजूद S&P ग्लोबल की रिपोर्ट इस क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाती है। राज्य में घोषित अधिकांश बड़ी परियोजनाएं अभी फिजिबिलिटी चरण में हैं। इसका मतलब है कि निवेश, तकनीक, उत्पादन लागत, खरीदारों की उपलब्धता और परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता जैसे पहलुओं पर अभी आगे काम किया जाना बाकी है।ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग के विस्तार के लिए उत्पादन क्षमता तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए लंबी अवधि के खरीदार, प्रतिस्पर्धी कीमत, परिवहन और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर तथा पर्याप्त रिन्यूएबल बिजली की उपलब्धता भी जरूरी होगी। इसके अलावा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता स्थापित करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
भारत ने भी राष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करना है, जहां सीधे बिजली के इस्तेमाल से उत्सर्जन घटाना मुश्किल है। रिफाइनिंग, उर्वरक, स्टील और भारी परिवहन जैसे क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल की व्यापक संभावनाएं देखी जा रही हैं।S&P ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के पास इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार, रिन्यूएबल एनर्जी संसाधन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मौजूद है। राज्य सरकार के वित्तीय प्रोत्साहन शुरुआती निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित परियोजनाएं फिजिबिलिटी चरण से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादन तक कितनी तेजी से पहुंचती हैं।कुल मिलाकर रिपोर्ट गुजरात को भारत के उभरते ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग में महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखती है। लगभग 50 गीगावाट सौर-पवन क्षमता, देश की बड़ी रिफाइनरी और अमोनिया क्षमता में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी तथा मजबूत बंदरगाह नेटवर्क राज्य को अनुकूल स्थिति देते हैं। अब चुनौती इन संरचनात्मक फायदों और नीतिगत प्रोत्साहनों को वास्तविक उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक परियोजनाओं में बदलने की होगी।
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