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₹62,500 करोड़ की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की गाइडलाइंस जारी

Kavita2
22 Aug 2026 10:54 AM IST
₹62,500 करोड़ की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की गाइडलाइंस जारी
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दीं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करना और देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करना है। योजना के तहत पात्र कंपनियों को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन यानी Production-Linked Incentive (PLI) का लाभ दिया जाएगा।

सरकार की नई योजना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण तेजी से बढ़ा है। सरकार का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

बड़े कारोबार वाली कंपनियों को मिलेगा लाभ

नई गाइडलाइंस के मुताबिक, मोबाइल फोन बनाने वाली वे कंपनियां योजना के तहत लाभ पाने की पात्र होंगी जिनका FY26 में टर्नओवर ₹10,000 करोड़ होगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को भी शामिल किया गया है।

इस प्रावधान का उद्देश्य ऐसे बड़े विनिर्माताओं को प्रोत्साहित करना है जो बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन का उत्पादन कर सकते हैं और भारत में अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने में सक्षम हैं।

मोबाइल फोन उद्योग में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। बड़ी वैश्विक कंपनियां अपने उत्पादों के निर्माण के लिए स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही हैं। ऐसे में सरकार की योजना का लाभ बड़े कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को भी मिलने से भारत में उत्पादन का पैमाना बढ़ सकता है।

भारतीय स्वामित्व वाली EMS कंपनियों के लिए भी प्रावधान

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी EMS कंपनियों के लिए भी पात्रता से जुड़े प्रावधान किए हैं। नई गाइडलाइंस में उन EMS कंपनियों को शामिल किया गया है जिनमें कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीयों के पास है और जो निर्धारित टर्नओवर मानदंड को पूरा करती हैं।

इस प्रावधान को घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों को अपने उत्पादन नेटवर्क का विस्तार करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, योजना के तहत पात्रता के लिए टर्नओवर और अन्य शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। कंपनियों को सरकार की ओर से तय मानदंडों के अनुसार आवेदन और निवेश संबंधी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

उत्पादन बढ़ाने पर मिलेगा प्रोत्साहन

MPMS का मूल उद्देश्य केवल कंपनियों को वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि वास्तविक उत्पादन बढ़ाना है। इसी कारण योजना में उत्पादन और निर्धारित प्रदर्शन मानकों को महत्व दिया गया है।

PLI व्यवस्था के तहत कंपनियों को भारत में किए गए अतिरिक्त उत्पादन और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे कंपनियों को अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, नई उत्पादन इकाइयां लगाने और आधुनिक तकनीक में निवेश करने के लिए प्रेरणा मिलती है।

सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से मोबाइल फोन के उत्पादन में तेजी आएगी और भारत वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए एक अधिक आकर्षक केंद्र बन सकेगा।

घरेलू सप्लाई चेन को मिलेगा बढ़ावा

मोबाइल फोन निर्माण बढ़ने का असर केवल अंतिम उत्पाद के उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मोबाइल फोन के लिए जरूरी कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक उद्योगों को भी फायदा मिल सकता है।

सरकार लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक्स की घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मोबाइल फोन निर्माण के साथ कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी संभावना है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ सकता है।

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिश

मोबाइल फोन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के सबसे तेजी से बढ़ने वाले हिस्सों में से एक हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में स्मार्टफोन उत्पादन और निर्यात दोनों में वृद्धि हुई है। सरकार अब इस गति को नई योजना के माध्यम से और आगे बढ़ाना चाहती है।

MPMS के जरिए बड़े घरेलू और वैश्विक विनिर्माताओं को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देने की कोशिश की गई है। इससे भारत को वैश्विक कंपनियों की सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने में मदद मिल सकती है।

नई योजना ऐसे समय लागू की जा रही है जब वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को कई देशों में फैलाने की रणनीति अपना रही हैं। भारत इस बदलाव का लाभ उठाकर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन निर्माण में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है।

निवेश और निर्यात पर भी नजर

सरकार को उम्मीद है कि ₹62,500 करोड़ की योजना के जरिए कंपनियों को नए निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ मोबाइल फोन के निर्यात में भी वृद्धि हो सकती है।

यदि कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं तो देश केवल घरेलू बाजार की मांग पूरी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए भी मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण कर सकता है।

नई गाइडलाइंस के बाद अब पात्र कंपनियों के लिए योजना में शामिल होने और निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर लाभ हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

घरेलू कंपनियों के लिए बड़ा अवसर

केंद्र सरकार की ₹62,500 करोड़ की MPMS को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। बड़ी मोबाइल फोन कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ-साथ निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली भारतीय स्वामित्व वाली EMS कंपनियों को भी इसमें अवसर मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ घरेलू मूल्य संवर्धन, निवेश, रोजगार और निर्यात को गति देना है। अब योजना के वास्तविक प्रभाव पर नजर रहेगी कि इससे कंपनियों के नए निवेश, उत्पादन क्षमता और भारत से मोबाइल फोन निर्यात में कितनी वृद्धि होती है।

कुल मिलाकर, नई MPMS भारत को मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में और मजबूत करने तथा वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में उसकी भूमिका बढ़ाने की सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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