
Business बिजनेस: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में देश का ग्रॉस GST कलेक्शन सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से वस्तुओं और सेवाओं की बेहतर सप्लाई और आयात (इम्पोर्ट) में बढ़ोतरी के कारण दर्ज की गई है।
पिछले वर्ष मई, 2025 में ग्रॉस GST कलेक्शन 1.88 लाख करोड़ रुपये था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है। लगातार बढ़ता GST संग्रह देश की आर्थिक गतिविधियों में सुधार और मांग में मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू लेन-देन से मिलने वाले टैक्स में भी योगदान स्थिर रूप से बढ़ा है। रिपोर्ट किए गए महीने में ग्रॉस सेंट्रल GST (CGST) का कलेक्शन 37,397 करोड़ रुपये रहा। वहीं स्टेट GST (SGST) के तहत 45,143 करोड़ रुपये का संग्रह दर्ज किया गया।
इसी अवधि में इंटीग्रेटेड GST (IGST) का कलेक्शन 51,990 करोड़ रुपये रहा, जो अंतरराज्यीय व्यापार और आयात-निर्यात गतिविधियों में सुधार को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि GST कलेक्शन में यह वृद्धि आर्थिक स्थिरता और उपभोग मांग में सुधार का संकेत है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में गतिविधियों के बढ़ने का भी इसमें योगदान रहा है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, टैक्स कलेक्शन में निरंतर सुधार से केंद्र और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है, जिससे विकास योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलती है।
कुल मिलाकर, मई का GST आंकड़ा यह दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार की प्रवृत्ति बनी हुई है और व्यापारिक गतिविधियों में स्थिरता देखी जा रही है।





