
Business व्यापार : डिजिटल इंडिया के दौर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज हर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। चाय की छोटी पेमेंट से लेकर बड़ी खरीदारी तक, अधिकतर लेनदेन अब UPI के जरिए ही किए जा रहे हैं। इसी बीच एक सवाल लोगों के बीच चर्चा में है कि क्या UPI का ज्यादा इस्तेमाल करने से सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट स्कोर पर कोई असर पड़ता है।
देशभर में लाखों लोग दिनभर में कई बार UPI का उपयोग करते हैं। ऐसे में यह जिज्ञासा और भी बढ़ जाती है कि कहीं बार-बार डिजिटल ट्रांजैक्शन करने से उनकी वित्तीय प्रोफाइल या क्रेडिट स्कोर पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ता।
विशेषज्ञों के अनुसार, UPI एक पेमेंट सिस्टम है, जिसका सीधा संबंध बैंक अकाउंट से होता है, लेकिन यह क्रेडिट स्कोर को प्रभावित नहीं करता। क्रेडिट स्कोर मुख्य रूप से लोन, क्रेडिट कार्ड और उनके भुगतान इतिहास पर आधारित होता है। यानी आपने समय पर लोन चुकाया है या नहीं, क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान कैसे किया है, इन्हीं बातों से स्कोर तय होता है।
UPI ट्रांजैक्शन केवल पैसे भेजने और प्राप्त करने का माध्यम है, इसलिए इसका सीधा असर CIBIL या किसी भी क्रेडिट रेटिंग पर नहीं पड़ता। चाहे कोई व्यक्ति दिन में कई बार UPI का इस्तेमाल करे या कम, इससे उसका क्रेडिट स्कोर नहीं बदलता।
हालांकि, अगर कोई व्यक्ति UPI से जुड़े बैंक अकाउंट में ओवरड्राफ्ट या क्रेडिट लाइन का उपयोग करता है, तो उस स्थिति में लोन रिपेमेंट पैटर्न के आधार पर क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ सकता है। लेकिन सामान्य UPI पेमेंट्स का इससे कोई संबंध नहीं है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट्स का बढ़ता उपयोग वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। लोग अपने खर्चों को ट्रैक कर पाते हैं, जिससे वे अपने बजट को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं। इसका अप्रत्यक्ष रूप से क्रेडिट हेल्थ पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
UPI के बढ़ते इस्तेमाल ने भारत में कैशलेस इकोनॉमी को भी मजबूती दी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक, सभी अब डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे पारदर्शिता भी बढ़ी है और लेनदेन आसान हुए हैं।





