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खरीफ सीजन से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक, यूरिया और डीएपी का भरपूर स्टॉक तैयार

Ratna Netam
6 Aug 2026 3:15 PM IST
खरीफ सीजन से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक, यूरिया और डीएपी का भरपूर स्टॉक तैयार
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बिजनेस :खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की संभावित कमी को देखते हुए सरकार ने उर्वरकों के आयात के स्रोतों में विविधता लाने का फैसला किया है। इसी रणनीति के तहत अप्रैल से जून 2026 के बीच भारत ने 17 देशों से कुल 15.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी का आयात किया। सरकार का दावा है कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता मांग से अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देशों पर निर्भर रहने के बजाय नए देशों से भी आयात बढ़ाया है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो और आपूर्ति प्रभावित न हो।
सरकार के अनुसार, इस बार यूरिया आयात के लिए ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के अलावा रूस, अमेरिका, वियतनाम, तुर्की, अल्जीरिया, मिस्र, जॉर्जिया, नाइजीरिया, फिनलैंड और मलेशिया सहित कई देशों से खरीद की गई। इससे आयात नेटवर्क मजबूत हुआ और समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी।
आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत ने 5.83 लाख टन यूरिया और 49 हजार टन डीएपी आयात किया। मई में 4.10 लाख टन यूरिया तथा 1.32 लाख टन डीएपी की खरीद हुई। वहीं जून में खरीफ सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए 5.15 लाख टन यूरिया और 5.30 लाख टन डीएपी का आयात किया गया। जून के दौरान यूरिया के लिए अल्जीरिया, मिस्र, रूस, नाइजीरिया और सऊदी अरब प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे, जबकि डीएपी की खरीद के लिए भारत ने अल्जीरिया, चीन, मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को, सऊदी अरब और अमेरिका का रुख किया।
डीएपी आयात के मामले में अप्रैल में पूरी मात्रा मोरक्को से मंगाई गई थी। मई में जॉर्डन, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया को भी आपूर्ति नेटवर्क में शामिल किया गया। जून में मांग बढ़ने पर सरकार ने कई नए देशों से आयात कर आपूर्ति को और मजबूत किया।
मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन से आयात सीमित रहा। अमेरिका ने जुलाई में केवल 60 हजार टन डीएपी की आपूर्ति की, जबकि चीन ने अप्रैल में 29 हजार टन यूरिया और जुलाई में 45 हजार टन डीएपी निर्यात किया। चीन ने पहले घरेलू जरूरतों का हवाला देते हुए यूरिया निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी।
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को देश में 54.22 लाख टन यूरिया और 20.93 लाख टन डीएपी का शुरुआती स्टॉक उपलब्ध था। 1 अप्रैल से 29 जुलाई के बीच देश की जरूरत 122.84 लाख टन यूरिया और 35.44 लाख टन डीएपी की थी, जबकि उपलब्धता क्रमशः 177.28 लाख टन यूरिया और 43.03 लाख टन डीएपी रही। यानी मांग की तुलना में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध रहे।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली के तहत अप्रैल से जुलाई के बीच 112.53 लाख टन यूरिया और 26.59 लाख टन डीएपी किसानों को वितरित किए गए। 29 जुलाई तक देश में 64.75 लाख टन यूरिया, 16.44 लाख टन डीएपी और 21.21 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का स्टॉक उपलब्ध था। इसके अलावा चालू खरीफ सीजन में जून तक घरेलू उत्पादन भी बढ़ा है। इस अवधि में 71.55 लाख टन यूरिया और 9.84 लाख टन डीएपी का उत्पादन किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयात के स्रोतों में विविधता लाने और पर्याप्त भंडारण की रणनीति से किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे बुवाई और फसल उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आयात तथा घरेलू उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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