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चीनी महंगी होने पर सरकार का जवाब एथनॉल नहीं है वजह
नई दिल्ली: त्योहारों के सीजन से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में बढ़ते दामों को लेकर यह सवाल उठने लगा था कि क्या पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण नीति के कारण चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि चीनी महंगी होने की वजह एथनॉल नहीं है। सरकार के अनुसार, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें कम उत्पादन, गन्ने की फसल को नुकसान, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग और कुछ जगहों पर जमाखोरी शामिल हैं।
एक महीने में तेजी से बढ़े चीनी के दाम
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, चीनी की औसत कीमत 20 जुलाई को करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर लगभग 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है, खासकर ऐसे समय में जब त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है।
सरकार का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
एथनॉल को जिम्मेदार बताना गलत: सरकार
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर एथनॉल उत्पादन पर सवाल उठाए जा रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ने से कीमतें नहीं बढ़ी हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा भारत में बनने वाले एथनॉल का बड़ा हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से तैयार किया जा रहा है।
कम उत्पादन और फसल नुकसान बना कारण
सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की संभावना है। गन्ने की फसल में बीमारी, अधिक बारिश और जलभराव जैसी वजहों से उत्पादन प्रभावित हुआ है। शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन था, जबकि अब उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी और मौसम संबंधी चिंताओं ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
सरकार ने उठाए कई कदम
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें चीनी स्टॉक पर सीमा तय करना, बाजार की निगरानी बढ़ाना और घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए आयात से जुड़े फैसले शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि देश में इतना स्टॉक उपलब्ध है कि नए पेराई सीजन तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है। साथ ही उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जा रहे हैं।
त्योहारों में राहत की उम्मीद
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में आपूर्ति बेहतर होने पर बाजार में स्थिरता आ सकती है। हालांकि फिलहाल आम लोगों को त्योहारों से पहले महंगी चीनी का सामना करना पड़ रहा है।
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