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गोल्ड ने पकड़ी रफ्तार, सुरक्षित निवेश की चाहत से 7 हफ्ते के शिखर पर भाव

Ratna Netam
6 Aug 2026 4:41 PM IST
गोल्ड ने पकड़ी रफ्तार, सुरक्षित निवेश की चाहत से 7 हफ्ते के शिखर पर भाव
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नई दिल्ली : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की बढ़ती मांग के बीच गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और निवेशकों के सुरक्षित विकल्प की ओर रुख करने से सोना सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन फिलहाल निवेशकों का भरोसा सोने पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले दिनों में सोने की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकती हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 536 रुपये यानी 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,49,029 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें और मजबूती आई तथा यह 1,49,700 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 1,207 रुपये यानी 0.81 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की लगातार खरीदारी और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के चलते सोने में यह तेजी देखने को मिली।
चांदी में भी शुरुआती कारोबार के दौरान मजबूती का रुख दिखाई दिया। सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा ने 2,28,397 रुपये प्रति किलोग्राम का इंट्राडे हाई बनाया, जो पिछले बंद भाव से 813 रुपये अधिक था। हालांकि ऊंचे स्तर पर कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिसके चलते बाद में चांदी 2,27,001 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। बावजूद इसके, विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की दीर्घकालिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बहुमूल्य धातुओं में तेजी का माहौल देखने को मिला। कॉमेक्स पर सोना करीब 0.36 प्रतिशत बढ़कर 4,320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि चांदी भी 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.36 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती रही। वैश्विक बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब रिपोर्टों में होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए जाने से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे वैश्विक महंगाई का दबाव घटेगा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव भी कम होगा। इसी संभावना के चलते अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट दर्ज की गई, जिसने सोने की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन दिया। आमतौर पर जब बॉन्ड यील्ड घटती है तो सोने जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश अधिक आकर्षक बन जाते हैं।
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर विशेषज्ञों ने सोने के लिए 1,50,000 से 1,50,700 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) बताया है। यदि कीमतें इस दायरे को मजबूती से पार कर जाती हैं तो अगला लक्ष्य 1,52,200 से 1,52,800 रुपये तक हो सकता है। वहीं नीचे की ओर 1,48,600 से 1,48,000 रुपये का स्तर प्रमुख समर्थन माना जा रहा है। यदि सोना इससे नीचे फिसलता है तो 1,46,600 से 1,46,000 रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोना 20, 50, 100 और 200 दिनों की सभी प्रमुख एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के ऊपर कारोबार कर रहा है, जो मजबूत तेजी का संकेत माना जाता है। यदि सोना 1,49,000 रुपये के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है तो 1,50,000 रुपये का स्तर पार करना मुश्किल नहीं होगा। हालांकि लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
चांदी को लेकर भी बाजार विशेषज्ञ सकारात्मक नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि यदि चांदी 2,29,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर मजबूती से टिकती है तो इसका अगला लक्ष्य 2,31,500 से 2,32,500 रुपये तक हो सकता है। दूसरी ओर 2,25,000 से 2,24,000 रुपये का स्तर इसका प्रमुख समर्थन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो अगला सपोर्ट 2,22,000 से 2,21,000 रुपये के बीच देखा जा सकता है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार चांदी फिलहाल 20-ईएमए और 200-ईएमए के ऊपर बनी हुई है तथा रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 54 पर पहुंच चुका है, जो बाजार में धीरे-धीरे बढ़ती मजबूती का संकेत देता है।
इस बीच ऊर्जा बाजार में नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.51 प्रतिशत गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 1 प्रतिशत टूटकर 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। कच्चे तेल में गिरावट को भविष्य में महंगाई कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आगे चलकर वैश्विक वित्तीय बाजारों और बहुमूल्य धातुओं की चाल पर भी पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर टिकी हुई हैं, जो सोने और चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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