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Delhi दिल्ली। पिछले कुछ समय से कीमती धातुओं (सोने-चांदी) की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस बीच, हफ्ते तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुएं कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंकाओं ने निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से दूर कर दिया है, जिसके चलते घरेलू और वैश्विक बाजारों में इन धातुओं पर दबाव बना हुआ है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कारोबार की शुरुआत से ही सोना और चांदी दबाव में दिखाई दिए। दिन के कारोबार में जुलाई डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव अपने पिछले बंद 2,25,834 रुपए से 3.9 प्रतिशत यानी 8,829 रुपए गिरकर 2,17,005 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को यह 2,22,579 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला। वहीं, अगस्त 2026 डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव दिन के कारोबार में अपने पिछले बंद 1,46,529 रुपए से 3.8 प्रतिशत यानी 5,601 रुपए गिरकर 1,40,928 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। बुधवार को यह 1,45,000 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
यह गिरावट पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी के बाद आई है, जब दोनों कीमती धातुओं में करीब 2 प्रतिशत तक की नरमी दर्ज की गई थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों के बीच जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ने और डॉलर में मजबूती के कारण सोने-चांदी की मांग प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में भी सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सोना 169 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस टूटकर 3,980 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गया, जो मध्य नवंबर के बाद पहली बार 4,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आया है।
जून में अब तक सोने की कीमतों में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। यदि यह रुझान महीने के अंत तक जारी रहता है, तो यह पिछले एक दशक से अधिक समय में सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट साबित हो सकती है। गौरतलब है कि पिछले तीन वर्षों में सोने ने लगातार दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की थी। केंद्रीय बैंकों, फंड मैनेजरों और खुदरा निवेशकों की मजबूत खरीदारी के कारण इसकी कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों ने इस तेजी पर विराम लगा दिया है।
चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। कॉमेक्स बाजार में चांदी करीब 4 डॉलर प्रति औंस टूटकर 58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। यह स्तर दिसंबर 2025 के बाद पहली बार देखने को मिला है। फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में लगभग 24 प्रतिशत और चांदी की कीमतों में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जो बाजार में जारी कमजोर धारणा को दर्शाता है। साल 2026 की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया था और जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ था। लेकिन फरवरी के अंत में वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति बनने के बाद बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई। इसके बाद से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे कीमती धातुओं में लगातार गिरावट देखने को मिली।
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते की दिशा में प्रयासों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श के सख्त रुख ने बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले सप्ताह हुई उनकी पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने निवेशकों को चौंका दिया और सोने-चांदी पर अतिरिक्त दबाव बना दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशक अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि ब्याज दरों की भविष्य की दिशा को लेकर स्पष्ट संकेत मिल सकें। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स में लगातार मजबूती सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाला सबसे बड़ा कारक बन गया है। डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है, क्योंकि बाजार यह मानकर चल रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है।
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