व्यापार
लक्ष्मीजी होंगी मेहरबान, पटाखों से सरकार की होगी बंपर कमाई
Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 12:13 PM IST

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चेन्नई। तमिलनाडु का शिवकाशी शहर एक बार फिर पटाखों के कारोबार को लेकर सुर्खियों में है। देशभर में दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान इस्तेमाल होने वाले पटाखों का बड़ा हिस्सा शिवकाशी में तैयार किया जाता है। यही वजह है कि इस शहर को भारत की पटाखा राजधानी भी कहा जाता है। पिछले साल तमिलनाडु के पटाखा उद्योग में करीब 7,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान बताया गया था। इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि कारोबार उम्मीद के मुताबिक रहा, तो इससे पटाखा निर्माताओं, व्यापारियों और श्रमिकों के साथ सरकार को भी आर्थिक लाभ मिल सकता है।
शिवकाशी में पटाखा उद्योग की धूम
तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में स्थित शिवकाशी देश के प्रमुख पटाखा उत्पादन केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में पटाखा निर्माण इकाइयां संचालित होती हैं। इन कारखानों में विभिन्न प्रकार के पटाखे, फुलझड़ियां, अनार, चकरी और अन्य आतिशबाजी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
शिवकाशी में पटाखा उद्योग केवल व्यापार का साधन नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है। पटाखा निर्माण से लेकर पैकिंग, परिवहन, थोक बिक्री और खुदरा व्यापार तक बड़ी संख्या में लोग इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।त्योहारी सीजन शुरू होने से कई महीने पहले ही यहां उत्पादन की तैयारियां तेज हो जाती हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से व्यापारी पटाखों के ऑर्डर देते हैं। इसके बाद तैयार माल को विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता है।
7000 करोड़ से 8000 करोड़ तक पहुंच सकता है कारोबार
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, पिछले साल तमिलनाडु में लगभग 7,000 करोड़ रुपये के पटाखों का कारोबार हुआ था। इस बार बिक्री बढ़कर करीब 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो पिछले साल की तुलना में कारोबार में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। प्रतिशत के लिहाज से यह वृद्धि करीब 14.3 प्रतिशत बैठती है।हालांकि, ये अनुमानित आंकड़े हैं। वास्तविक बिक्री का पता कारोबारी सीजन समाप्त होने और संबंधित आंकड़े सामने आने के बाद ही चलेगा।
त्योहारों में बढ़ती है पटाखों की मांग
भारत में दिवाली के अवसर पर पटाखों की सबसे अधिक मांग रहती है। इसके अलावा शादी-विवाह, नए साल और अन्य आयोजनों में भी आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाता है।त्योहारी सीजन में पटाखों की मांग बढ़ने से शिवकाशी के कारखानों में उत्पादन और पैकिंग का काम तेज हो जाता है। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े थोक विक्रेताओं तक सभी को इस कारोबार से फायदा मिलने की उम्मीद रहती है।हालांकि, पटाखों की बिक्री पर स्थानीय प्रतिबंध, पर्यावरण संबंधी नियम, मौसम और उपभोक्ताओं की पसंद का भी असर पड़ सकता है।
विजय सरकार के राजस्व में भी हो सकती है बढ़ोतरी
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार के लिए भी पटाखा उद्योग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विजय ने 10 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। राज्य सरकार इस उद्योग के आधुनिकीकरण और विस्तार पर ध्यान दे रही है।पटाखों की बिक्री बढ़ने से जीएसटी के माध्यम से कर राजस्व में वृद्धि संभव है। हालांकि, पूरे 8,000 करोड़ रुपये को सरकार की कमाई नहीं माना जा सकता। कारोबार और वास्तविक कर संग्रह अलग-अलग आंकड़े होते हैं। जीएसटी से मिलने वाली राशि का बंटवारा लागू नियमों के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच होता है।
लाखों परिवारों की आजीविका का सहारा
शिवकाशी के पटाखा उद्योग का महत्व केवल बिक्री तक सीमित नहीं है। उद्योग संबंधी दस्तावेजों के मुताबिक यहां 1,070 से अधिक लाइसेंस प्राप्त निर्माण इकाइयां हैं। इनसे लगभग तीन लाख श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है, जबकि करीब पांच लाख परिवारों की आजीविका इस औद्योगिक गतिविधि से जुड़ी बताई जाती है।कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के अलावा पैकेजिंग सामग्री बनाने वाले कारोबारी, ट्रांसपोर्ट कंपनियां और वितरक भी इस उद्योग पर निर्भर हैं। कारोबार बढ़ने से इन सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
ग्रीन पटाखों और विदेशी बाजार पर जोर
पटाखा उद्योग के सामने पर्यावरण संरक्षण की चुनौती भी है। वायु प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंताओं और कानूनी नियमों के कारण निर्माता ग्रीन पटाखों के उत्पादन पर जोर दे रहे हैं।विजय सरकार शिवकाशी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्थापित करना चाहती है। यूरोप और अमेरिका के खरीदारों की ओर से पूछताछ होने की खबरें सामने आई हैं। सरकार आधुनिक तकनीक, बेहतर परिवहन सुविधाओं और निर्यात संबंधी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती
पटाखा उद्योग में विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल होने के कारण श्रमिकों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। शिवकाशी और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी कारखानों में विस्फोट और आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं।इसी को देखते हुए औद्योगिक सुरक्षा, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। राज्य में परीक्षण, प्रमाणन, अनुसंधान और कौशल प्रशिक्षण के लिए एक साझा सुविधा केंद्र विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है।
कारोबार बढ़ने की उम्मीद, लेकिन चुनौतियां बरकरार
शिवकाशी का पटाखा उद्योग इस बार 8,000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, विभिन्न उद्योग संगठनों के बिक्री अनुमानों में अंतर है और इस लक्ष्य की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।उत्पादन लागत, पर्यावरण नियम, मौसम, श्रमिक सुरक्षा और बाजार में उपलब्धता जैसे कारक वास्तविक बिक्री को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि शिवकाशी का पटाखा उद्योग तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि बिक्री बढ़ती है और उद्योग का सुरक्षित एवं आधुनिक विस्तार होता है, तो इसका लाभ कारोबारियों, श्रमिकों और सरकार तीनों को मिल सकता है।
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