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वैश्विक अनिश्चितता का घरेलू बाजार पर पड़ सकता है प्रभाव: RBI

Tara Tandi
22 Oct 2026 12:46 PM IST
वैश्विक अनिश्चितता का घरेलू बाजार पर पड़ सकता है प्रभाव: RBI
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New Delhi: वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती और जुझारूपन (Resilience) का प्रदर्शन कर रही है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 5 से 7 अक्टूबर के दौरान आयोजित मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के जारी मिनट्स (कार्यवृत्त) में देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, संभावित जोखिमों और मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तार से समीक्षा की गई है।
1. वैश्विक अनिश्चितता और बाहरी दबाव
सप्लाई चेन और ऊर्जा संकट: पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गहरा दबाव बना हुआ है।
घरेलू बाजार पर प्रभाव: RBI का मानना है कि इन वैश्विक उथल-पुथल का असर भारतीय आर्थिक गतिविधियों पर आंशिक रूप से पड़ता रहेगा। हालांकि, भारत ने आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर इन प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया है।
2. कृषि क्षेत्र, ग्रामीण मांग और खाद्य सुरक्षा
मौसम और अल नीनो का प्रभाव: दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनियमितता और 'अल नीनो' (El Nino) की मजबूत स्थितियों के कारण कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मांग के समक्ष अनिश्चितता के जोखिम उत्पन्न हुए हैं।
राहत के कारक: खाद्यान्न के पर्याप्त बफर स्टॉक (Buffer Stock) की उपलब्धता और केंद्र सरकार द्वारा समय रहते किए गए नीतिगत फैसलों से कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सफलता मिलेगी।
3. शहरी मांग, रोजगार और सेवा क्षेत्र
शहरी मांग को मजबूती: देश के सेवा क्षेत्र (Service Sector) में बनी हुई निरंतर तेजी और रोजगार के स्थिर अवसरों के कारण शहरी खपत और मांग मजबूत बनी हुई है।
निवेश और क्रेडिट ग्रोथ: उद्योगों में क्षमता का बेहतर उपयोग (Capacity Utilization), बैंकों से कर्ज/क्रेडिट का मजबूत प्रवाह और इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) पर सरकार का विशेष जोर निवेश गतिविधियों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
निर्यात परिदृश्य: सेवा निर्यात में तेजी बनी रहने की उम्मीद है, वहीं विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौतों से भारतीय वस्तुओं के निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
4. आर्थिक विकास (GDP) का नया अनुमान
संजय मल्होत्रा का वक्तव्य: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार सराहनीय है।
अपग्रेड हुआ अनुमान: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर (GDP Growth Rate) का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है। यह अगस्त में लगाए गए 6.7 प्रतिशत के पिछले अनुमान से 40 बेसिस पॉइंट्स (0.40%) अधिक है।
5. महंगाई (CPI Inflation) का उभरता दबाव
हेडलाइन CPI में बढ़ोतरी: केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ रहा है। तीसरी तिमाही (Q3) में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित हेडलाइन महंगाई दर के ऊपरी सहन-सीमा (Upper Tolerance Band - 6%) तक पहुँचने के आसार हैं।
आगामी तिमाहियों का परिदृश्य: आने वाली अगली दो तिमाहियों के दौरान भी महंगाई दर के 5 प्रतिशत से काफी ऊपर बने रहने का अनुमान जताया गया है।
मौद्रिक कारक: हालांकि घरेलू मांग की ओर से अत्यधिक महंगाई का दबाव देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन मुद्रा आपूर्ति (Monetary Aggregates) और कुल क्रेडिट में हुई तेज वृद्धि के कारण महंगाई से जुड़े जोखिम बने हुए हैं।
6. मौद्रिक नीति (MPC) के कड़े फैसले
रेपो रेट में बढ़ोतरी: महंगाई के बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।
'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) का रुख: MPC ने अपने रुख में बदलाव करते हुए इसे 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदल दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि:
निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
आने वाले समय में आर्थिक आंकड़ों के आधार पर या तो दरों को वर्तमान स्तर (5.50%) पर स्थिर रखा जाएगा या फिर स्थिति के अनुसार इनमें और बढ़ोतरी की जा सकती है।
भविष्य की रणनीति: RBI ने स्पष्ट किया है कि दर वृद्धि चक्र की अवधि और इसका दायरा अंतर्निहित महंगाई (Underlying Inflation), सप्लाई शॉक के द्वितीयक प्रभाव (Second-Round Effects) और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।
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