वैश्विक तनाव और बिकवाली से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 450 अंक से ज्यादा टूटा

Mumbai मुंबई : मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कमजोरी का माहौल देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत के साथ ही प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 452 अंकों से अधिक टूटकर 73,815.12 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 153 अंक की गिरावट के साथ 23,229 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस गिरावट का असर विभिन्न सेक्टरों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयरों में मुनाफावसूली और वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर सतर्क रुख अपनाने से घरेलू बाजार में कमजोरी आई है। निवेशक फिलहाल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
इस दौरान इंडिया VIX, जिसे बाजार में अस्थिरता का प्रमुख संकेतक माना जाता है, 2.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16.13 के स्तर पर रहा। हालांकि VIX में गिरावट आमतौर पर कम अस्थिरता का संकेत देती है, लेकिन बाजार में निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है।
बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर के कई प्रमुख शेयर दबाव में नजर आए। वहीं कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में सीमित खरीदारी भी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रमों का असर भारतीय बाजार पर बना रह सकता है।
निवेश सलाहकारों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक मजबूत कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार की दिशा स्पष्ट होने तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
बाजार जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं पर बनी हुई है।





