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2026 तक डेटा सेंटरों की बिजली खपत में 26.4% वृद्धि का अनुमान, AI प्रमुख कारण
New Delhi: बुधवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में डेटा सेंटर्स के लिए दुनिया भर में बिजली की मांग 26.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। खपत 2025 के 447 TWh (टेरावाट-घंटे) से बढ़कर 565 TWh हो जाएगी।
AI वर्कलोड से मांग में बढ़ोतरी
बिजनेस और टेक्नोलॉजी इनसाइट्स कंपनी गार्टनर, इंक. की रिपोर्ट में कहा गया है कि खपत में यह अनुमानित बढ़ोतरी 'कंप्यूट-इंटेंसिव' (बहुत ज़्यादा कंप्यूटिंग पावर की ज़रूरत वाले) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्कलोड के कारण हो रही है, जो बिजली की ज़रूरतों को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर की बिजली की मांग 2025 में 104 गीगावाट से बढ़कर 2026 में 132 गीगावाट हो जाएगी और 2030 तक इसके 290 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। यह GenAI (जेनरेटिव AI) द्वारा मांग को बढ़ाने के अभूतपूर्व पैमाने और गति को दर्शाता है।
गार्टनर की डायरेक्टर एनालिस्ट लिंगलान वांग ने कहा, "AI क्षमता अब बिजली की उपलब्धता से सीमित हो गई है, जिससे डेटा सेंटर की बिजली सुरक्षा वैश्विक AI दौड़ में मार्जिन बढ़ाने और सुरक्षित रखने के लिए नया 'बैटलग्राउंड' (मुकाबले का मैदान) बन गई है।"
AI-ऑप्टिमाइज़्ड सर्वर और ऊर्जा की खपत
AI-ऑप्टिमाइज़्ड सर्वर डेटा सेंटर में बिजली की खपत बढ़ाने का काम जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 में डेटा सेंटर की कुल बिजली खपत में AI-ऑप्टिमाइज़्ड सर्वर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत होगी और 2027 तक इनकी बिजली खपत पारंपरिक सर्वर से ज़्यादा हो जाएगी।
2030 तक डेटा सेंटर की बिजली खपत 1,200 TWh से ज़्यादा होने का अनुमान है, ऐसे में भविष्य में बनने वाले डेटा सेंटर्स की मांग को पूरा करने के लिए ग्रिड सप्लाई नाकाफी होगी, जिससे सभी यूज़र्स प्रभावित होंगे।
दक्षता और सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) के उपाय
वांग ने कहा, "इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन्स (I&O) लीडर्स को दक्षता बढ़ाने और सुरक्षित ग्रिड एक्सेस सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्हें बिजली की कमी को कम करने और सस्टेनेबल व स्केलेबल ग्रोथ सुनिश्चित करने के लिए हाई-एफिशिएंसी कूलिंग सिस्टम और एज कंप्यूटिंग में भी निवेश करने की ज़रूरत है।" कूलिंग और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतें भी तेज़ी से बढ़ रही हैं - 2026 में 22.6% और 2027 में 24.6%।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल डेटा सेंटर्स ने सऊदी अरब जितनी बिजली की खपत की थी। अगर 2030 तक बिजली की खपत दोगुनी हो जाती है, तो उससे होने वाले कार्बन फ़ुटप्रिंट की भरपाई के लिए दस सालों में 6.7 अरब पेड़ लगाने होंगे।
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