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किसानों की योजना का पूरा हिसाब आया सामने

Saba Naaz
31 July 2026 4:55 PM IST
किसानों की योजना का पूरा हिसाब आया सामने
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी ने योजना के बजट और खर्च से जुड़ी अहम तस्वीर पेश की है। आरटीआई से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में केंद्र सरकार ने पीएम किसान योजना के लिए लगातार बड़ा बजट आवंटित किया, लेकिन कई वित्तीय वर्षों में आवंटित राशि का पूरा उपयोग नहीं हो पाया।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। योजना का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े खर्चों में मदद देना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार ने हर साल योजना के लिए बजट में बड़ी राशि का प्रावधान किया, लेकिन वास्तविक खर्च कई बार तय बजट से कम रहा। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें लाभार्थियों की संख्या में बदलाव, किसानों के रिकॉर्ड का सत्यापन, आधार लिंकिंग, ई-केवाईसी प्रक्रिया और अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाने जैसी प्रक्रियाएं प्रमुख हैं।

सरकार की ओर से समय-समय पर योजना के लाभार्थियों का सत्यापन किया जाता है, ताकि केवल योग्य किसानों को ही सहायता राशि मिल सके। कई राज्यों में भूमि रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कुछ नाम हटाए गए, जिसके कारण लाभार्थियों की संख्या में कमी आई और बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका।

PM-KISAN योजना देश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से करोड़ों किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजे जाते हैं। सरकार का दावा है कि इस योजना से किसानों को खेती के समय बीज, खाद, सिंचाई और अन्य जरूरी खर्चों में आर्थिक मदद मिलती है।

योजना शुरू होने के बाद से केंद्र सरकार लगातार इसकी समीक्षा करती रही है। डिजिटल माध्यम से भुगतान होने के कारण योजना में पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों तक सहायता राशि सीधे पहुंच रही है। हालांकि, लाभार्थियों की पहचान और पात्रता को लेकर लगातार जांच प्रक्रिया भी जारी रहती है।

आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जब योजना के लिए बजट निर्धारित किया गया था तो उसका पूरा उपयोग क्यों नहीं हो पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं में बजट और वास्तविक खर्च के बीच अंतर कई बार लाभार्थियों की संख्या, प्रशासनिक प्रक्रिया और सत्यापन अभियान के कारण होता है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने पीएम किसान योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला लिया है। इसके लिए लगभग 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में भी पात्र किसानों को इस योजना का लाभ मिलता रहेगा।

कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए पीएम किसान योजना को सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल किया गया है। योजना के माध्यम से अब तक करोड़ों किसानों को सहायता राशि दी जा चुकी है। आने वाले समय में सरकार का फोकस योजना को और प्रभावी बनाने, लाभार्थियों की पहचान को मजबूत करने और डिजिटल प्रक्रिया को बेहतर करने पर रहेगा।

आरटीआई से सामने आई जानकारी ने जहां योजना के खर्च और बजट उपयोग की स्थिति स्पष्ट की है, वहीं यह भी दिखाया है कि बड़ी संख्या वाली योजनाओं में पारदर्शिता और सही लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करना लगातार एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार अब अगले पांच वर्षों में योजना के बेहतर क्रियान्वयन और किसानों तक अधिक प्रभावी तरीके से सहायता पहुंचाने की दिशा में काम करने की तैयारी में है।

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