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India में फ्यूल डिमांड ग्रोथ धीमी रहने का अनुमान, केप्लर ने 2026 का अनुमान घटाया

Kavita2
24 May 2026 2:15 PM IST
India में फ्यूल डिमांड ग्रोथ धीमी रहने का अनुमान, केप्लर ने 2026 का अनुमान घटाया
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Business बिजनेस: आने वाले महीनों में भारत में फ्यूल की मांग में वृद्धि की रफ्तार धीमी रहने की संभावना जताई गई है। एनर्जी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, ऊंची ईंधन कीमतों और सरकार की सख्त नीतियों का असर ट्रैवल और ट्रांसपोर्टेशन गतिविधियों पर पड़ सकता है, जिससे फ्यूल खपत की वृद्धि सीमित रह सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 के लिए भारत में रिफाइंड फ्यूल की डिमांड ग्रोथ के अनुमान में लगभग 40 प्रतिशत की कटौती की गई है। यह संशोधन दर्शाता है कि पहले के अनुमान की तुलना में बाजार की अपेक्षित खपत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

केप्लर ने अपने नए अनुमान में लगभग 77,000 बैरल प्रति दिन की कटौती की है। इसके बाद अब भारत में सालाना फ्यूल डिमांड ग्रोथ का अनुमान 1,28,000 बैरल प्रति दिन से घटाकर 78,000 बैरल प्रति दिन कर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी से निजी और व्यावसायिक दोनों तरह की यात्रा पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से लॉजिस्टिक्स सेक्टर की गतिविधियों पर भी दबाव देखा जा रहा है। यही कारण है कि रिफाइंड फ्यूल की मांग अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि सरकार द्वारा ऊर्जा खपत को नियंत्रित करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की नीतियां भी पारंपरिक फ्यूल डिमांड पर असर डाल रही हैं।

हालांकि, भारत अब भी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ईंधन बाजारों में से एक बना हुआ है, लेकिन ग्रोथ रेट में यह संभावित गिरावट वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के लिए रणनीतिक बदलाव का संकेत हो सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में ईंधन बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, घरेलू आर्थिक गतिविधियों और परिवहन क्षेत्र की मांग पर निर्भर करेगी।

फिलहाल, यह अनुमान ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सुस्ती की ओर इशारा कर रहा है, जिस पर उद्योग जगत और नीति निर्माताओं की नजर बनी हुई है।

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