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ईमेल से लेकर शॉपिंग तक संभालेगा Muse AI
नई दिल्ली: Meta ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए Muse नाम का नया पर्सनल AI एजेंट लॉन्च किया है। कंपनी का कहना है कि Muse को सामान्य चैटबॉट की तरह केवल सवालों के जवाब देने के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि यह यूजर की तरफ से वास्तविक डिजिटल काम भी कर सकता है। फिलहाल इसे अमेरिका में रोलआउट किया जा रहा है।
सवाल पूछिए नहीं काम सौंप दीजिए
Muse की सबसे बड़ी खासियत उसकी agentic capability है। यूजर उसे कोई लक्ष्य या काम बता सकता है और वह आगे के जरूरी कदम खुद तय कर सकता है। मसलन Muse ईमेल तैयार करने और भेजने, यात्रा बुक करने, ऑनलाइन फॉर्म भरने, खरीदारी करने और बड़े लक्ष्यों के लिए व्यक्तिगत योजना बनाने जैसे काम कर सकता है। लंबे कामों में ऐप बंद होने के बाद भी यह बैकग्राउंड में काम जारी रख सकता है।
Instagram की सेव की गई Reel से बना सकता है Grocery List
Muse को Meta के अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने की क्षमता इसे खास बनाती है। कंपनी ने उदाहरण दिया है कि अगर किसी यूजर ने Instagram पर कोई रेसिपी Reel सेव की है तो Muse उससे जरूरी सामग्री समझकर ग्रोसरी लिस्ट तैयार कर सकता है। यह डिनर पार्टी के लिए मेन्यू सुझाने के साथ दोस्तों की पहले बताई गई dietary preferences को भी याद रख सकता है।
ईमेल से पेमेंट तक कर सकता है काम
Muse को ईमेल, कैलेंडर और दूसरे थर्ड-पार्टी ऐप्स से जोड़ा जा सकता है। ऑनलाइन खरीदारी के दौरान यह चेकआउट तक पहुंच सकता है। Meta ने पेमेंट के लिए Stripe के Link को शामिल किया है और Shop Pay सपोर्ट भी आने वाला है। हालांकि खरीदारी या ईमेल भेजने जैसे संवेदनशील कामों से पहले यूजर की मंजूरी लेने की व्यवस्था रखी गई है।
WhatsApp से भी कर सकेंगे इस्तेमाल
Muse को अलग ऐप के साथ WhatsApp के जरिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका में इसका रोलआउट iOS और Android पर शुरू हुआ है। Meta के मुताबिक आगे इसे AI स्मार्ट ग्लासेज तक पहुंचाने की योजना है।
Muse Spark है इसके पीछे का AI मॉडल
Muse को Muse Spark मॉडल पावर करता है। इसे खास तौर पर ऐसे कामों के लिए तैयार किया गया है जिनमें AI को केवल जवाब नहीं देना बल्कि टूल्स इस्तेमाल करके कई चरणों में काम पूरा करना होता है।
प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर Meta का बड़ा दांव
इतने सारे निजी ऐप और डेटा तक AI को पहुंच देने से सुरक्षा का सवाल भी बड़ा हो जाता है। Meta के मुताबिक प्रत्येक Muse एक अलग Muse Secure VM यानी सुरक्षित वर्चुअल कंप्यूटर पर चलता है। इसके साथ एक अलग Sentinel सिस्टम भी काम करता है, जो Muse द्वारा इंटरनेट या कनेक्टेड सेवाओं पर की जाने वाली कार्रवाइयों की निगरानी करता है।
यूजर खुद तय कर सकता है कि Muse को किन ऐप्स का कितना एक्सेस देना है और बाद में अनुमति वापस भी ली जा सकती है। Meta का कहना है कि Muse की बातचीत और उसके VM में मौजूद डेटा को कंपनी के विज्ञापन सिस्टम के साथ शेयर नहीं किया जाता। AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए Muse interactions के इस्तेमाल से opt out करने का विकल्प भी दिया गया है। हालांकि सुरक्षा चुनौती खत्म नहीं हुई है। Meta खुद स्वीकार करता है कि AI एजेंट गलतियां कर सकते हैं और बाहरी कंटेंट के जरिए उन पर prompt-injection जैसे हमलों की कोशिश हो सकती है। कंपनी ने Muse के लिए सार्वजनिक bug bounty भी शुरू की है, जिसमें गंभीर खामी खोजने वालों के लिए अधिकतम 3 लाख डॉलर तक के पुरस्कार का प्रावधान है।
भारत में कब मिलेगा Muse?
फिलहाल Muse का शुरुआती रोलआउट अमेरिका तक सीमित है। Meta ने इसे दुनिया भर में उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षा जताई है, लेकिन भारत में लॉन्च की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की है। ज्यादातर सामान्य उपयोग मुफ्त रहेगा, जबकि ज्यादा इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान भी होंगे।
Muse के साथ Meta की कोशिश AI को “पूछो और जवाब पाओ” से “काम बताओ और पूरा करवाओ” वाली दिशा में ले जाने की है। इसकी असली परीक्षा यह होगी कि रोजमर्रा के कामों में यह कितना भरोसेमंद साबित होता है और यूजर्स अपने ईमेल, कैलेंडर, खरीदारी तथा दूसरे निजी डेटा तक इसे कितनी पहुंच देने में सहज महसूस करते हैं।
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