
नई दिल्ली। भारत की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के जाने-माने टेक विशेषज्ञ और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सरकार चाहती है कि परीक्षा प्रणाली को तकनीक आधारित, सुरक्षित और ज्यादा भरोसेमंद बनाया जाए।
नंदन नीलेकणि का नाम भारत में डिजिटल बदलाव के बड़े चेहरों में शामिल है। खास बात यह है कि सरकार चाहे किसी भी राजनीतिक दल की रही हो, लेकिन जब भी देश में बड़े तकनीकी सुधारों की बात आती है, तो नीलेकणि की विशेषज्ञता पर भरोसा किया गया है। आधार से लेकर GST नेटवर्क, UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी भूमिका रही है।
अब उनकी नई जिम्मेदारी देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से जुड़े विवादों के बाद सरकार की कोशिश है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सके।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि का जन्म साल 1955 में बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स में काम किया, जहां उनकी मुलाकात नारायण मूर्ति से हुई।
साल 1981 में नंदन नीलेकणि ने नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की। यह कंपनी आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल हुई और दुनियाभर में भारतीय तकनीकी क्षमता की पहचान बनी।
नीलेकणि ने साल 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के CEO के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने कंपनी में सह-अध्यक्ष की भूमिका निभाई। साल 2017 में वे दोबारा इन्फोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने और कंपनी के नेतृत्व बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आधार प्रोजेक्ट से मिली बड़ी पहचान
नंदन नीलेकणि की सबसे बड़ी पहचान भारत के आधार कार्ड प्रोजेक्ट से जुड़ी है। साल 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया था।
उनके नेतृत्व में आधार योजना को आगे बढ़ाया गया। आज आधार भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। सरकारी योजनाओं के लाभ, बैंकिंग सेवाओं, टैक्स सिस्टम और पहचान सत्यापन जैसे क्षेत्रों में आधार का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है।
UPI और डिजिटल क्रांति में योगदान
भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति में भी नंदन नीलेकणि की अहम भूमिका रही है। उन्होंने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI के सलाहकार के रूप में काम किया और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को बढ़ावा देने में योगदान दिया।
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बना दिया और आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल है। सरकार का मानना है कि जिस तरह नीलेकणि ने डिजिटल सिस्टम को मजबूत बनाने में योगदान दिया, उसी तरह वे परीक्षा व्यवस्था को भी तकनीक के जरिए बेहतर बना सकते हैं।
किन बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि कई महत्वपूर्ण सरकारी और डिजिटल परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। इनमें आधार, GST नेटवर्क, UPI, TAGUP यानी टेक्नोलॉजी एडवाइजरी ग्रुप फॉर यूनिक प्रोजेक्ट्स, G20 डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर टास्क फोर्स और ONDC जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।
GST लागू करने के लिए जरूरी डिजिटल सिस्टम तैयार करने में भी उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया। वहीं ONDC के जरिए डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने में भी उन्होंने सलाहकार की भूमिका निभाई।
अब परीक्षा सुधार की जिम्मेदारी मिलने के बाद देश की नजरें नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली टास्क फोर्स पर हैं। छात्रों और अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नई व्यवस्था से पेपर लीक जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी और प्रतियोगी परीक्षाएं ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनेंगी। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नीलेकणि का तकनीकी अनुभव भारत की परीक्षा प्रणाली में कितना बड़ा बदलाव ला पाता है।





