
Mumbai मुंबई : क्विक-कॉमर्स स्टार्टअप ज़ेप्टो ने अपने अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में खुलासा किया कि कंपनी के फाउंडर्स आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा को इस साल की शुरुआत में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) द्वारा बुलाया गया था। यह कदम कंपनी के प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से कुछ महीने पहले उठाया गया था।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने 8 अप्रैल, 2026 को ज़ेप्टो के फाउंडर्स को समन जारी किया था। समन में कंपनी के विदेशी और ओवरसीज़ इन्वेस्टमेंट, वित्तीय वर्ष 2021 से ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, लोन और गारंटी, इनकम टैक्स रिटर्न, बैंक अकाउंट डिटेल्स, अचल संपत्तियों और कंपनी के बिज़नेस मॉडल से जुड़े विस्तृत दस्तावेज़ मांगे गए थे।
ज़ेप्टो की फाइलिंग में कहा गया है कि फाउंडर्स ने ED द्वारा मांगी गई जानकारी और दस्तावेज़ पेश किए। कैवल्य वोहरा 17 अप्रैल और 22 अप्रैल को ED के सामने पेश हुए, जबकि आदित पालिचा 20 अप्रैल और 15 मई को पूछताछ में शामिल हुए। दोनों ने एजेंसी को कंपनी के होल्डिंग स्ट्रक्चर, स्कीम ऑफ अरेंजमेंट, बिजनेस एग्रीमेंट और इनवॉइस से संबंधित विवरण भी दिए।
ED का यह कदम कंपनी के वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन की जांच के लिए लिया गया। ज़ेप्टो की फाइलिंग में यह भी उल्लेख किया गया कि फाउंडर्स ने एजेंसी के सवालों के जवाब दिए और सभी आवश्यक दस्तावेज़ प्रदान किए। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी IPO से पहले अपने सभी कानूनी और वित्तीय ब्योरे को स्पष्ट करने के प्रयास में थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ED द्वारा जांच और समन जारी करना बड़े स्टार्टअप्स के लिए आम प्रक्रिया है, खासकर तब जब वे IPO की तैयारी कर रहे हों। इसका मकसद निवेशकों और रेगुलेटरी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के वित्तीय और कॉर्पोरेट रिकॉर्ड पूरी तरह से सही और पारदर्शी हैं।
ज़ेप्टो के DRHP अपडेट में यह खुलासा आने के बाद बाजार और निवेशकों की नजर कंपनी की IPO प्रक्रिया पर और बढ़ गई है। फाउंडर्स की ED के सामने पेशी से निवेशकों में विश्वास बनाने का प्रयास भी देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, ज़ेप्टो के फाउंडर्स आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा ने ED के समन का पालन करते हुए सभी आवश्यक दस्तावेज़ और जानकारी प्रदान की। यह कदम कंपनी के IPO के लिए कानूनी और वित्तीय तैयारी की पारदर्शिता को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी नियामकीय मानकों के अनुरूप कदम उठा रही है और निवेशकों को विश्वास देने का प्रयास कर रही है।
यह घटना भारतीय स्टार्टअप और क्विक-कॉमर्स सेक्टर में IPO और रेगुलेटरी अनुपालन के महत्व को भी रेखांकित करती है।





