
Karnataka कर्नाटक: फिच रेटिंग्स ने मंगलवार को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत के GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती करते हुए इसे 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबावों के कारण विकास दर पर असर देखने को मिलेगा।
फिच के अनुसार, US-ईरान युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय तनावों का असर सितंबर और दिसंबर तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने की संभावना है।
रेटिंग एजेंसी ने अपने जून ग्लोबल इकॉनमिक आउटलुक में यह भी अनुमान जताया है कि FY27 में भारत की आर्थिक वृद्धि FY26 के 7.4 प्रतिशत के मुकाबले घटकर 6.4 प्रतिशत रह सकती है। फिच का कहना है कि बढ़ती कीमतें वास्तविक आय को प्रभावित करेंगी, जिससे घरेलू उपभोग पर दबाव बनेगा। इसके साथ ही मजबूत कैपिटल खर्च के बावजूद उपभोक्ता खर्च में गिरावट देखी जा सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मांग (डोमेस्टिक डिमांड) अभी भी विकास का मुख्य चालक बनी रहेगी, लेकिन आयात में कमी के चलते नेट एक्सटर्नल डिमांड से ग्रोथ को कुछ हद तक सकारात्मक योगदान मिल सकता है।
फिच ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं और तेल सहित अन्य कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की विकास दर पर पड़ सकता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता निवेश और व्यापार प्रवाह को भी प्रभावित कर सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो इसका असर न केवल भारत बल्कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिच का यह संशोधित अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सतर्क संकेत माना जा रहा है, हालांकि दीर्घकाल में देश की विकास क्षमता मजबूत बनी रहने की उम्मीद जताई गई है।





