Farmers' की आय बढ़ी, ग्लोबल मार्केट में पहुंचा भारतीय स्वाद

New Delhi नई दिल्ली : भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य (प्रोसेस्ड फूड) उत्पादों की वैश्विक बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग राज्यों के फल, मिलेट आधारित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को भारत के बढ़ते निर्यात क्षेत्र को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के खेतों, बागों और खाद्य उद्योगों से निकलने वाले उत्पाद अब दुनिया के कई देशों में पहुंच रहे हैं। इसका सीधा लाभ किसानों, महिला किसान समूहों और छोटे उद्यमियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि निर्यात बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और देश के MSME क्षेत्र को भी मजबूती मिल रही है।
पीयूष गोयल ने कहा कि असम के खेतों से लेकर कश्मीर के बागों तक और वाराणसी के खाद्य उद्योग से लेकर कर्नाटक के मिलेट नवाचार तक, भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान मिल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत वैश्विक खाद्य बाजार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
झारखंड के अमरपाली आम की ब्रिटेन और दुबई में पहुंच
भारत के कृषि निर्यात में झारखंड का अमरपाली आम खास आकर्षण का केंद्र बना है। पहली बार झारखंड का यह प्रसिद्ध आम ब्रिटेन और दुबई के बाजारों तक पहुंचा है। खास बात यह है कि इस निर्यात का संचालन महिला किसान उत्पादक कंपनी (FPO) द्वारा किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिले बेहतर दामों के कारण महिला किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में करीब 180 प्रतिशत तक अधिक आय प्राप्त हुई।
मिलेट और खाद्य उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान
भारत के मोटे अनाज यानी मिलेट उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। कर्नाटक के बाजरा आधारित फंक्शनल फूड का पहली बार न्यूजीलैंड को निर्यात किया गया है। यह भारतीय मिलेट उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता और स्वास्थ्य लाभों की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
वहीं, ओडिशा से 22.6 टन सूखा होल एग पाउडर ऑस्ट्रिया भेजा गया है। यूरोपीय संघ के सख्त गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
कश्मीर, उत्तराखंड और पंजाब के किसानों को लाभ
जम्मू-कश्मीर के बागवानों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से फायदा मिला है। घाटी के अरेको चेरी और सेंट्रोस प्लम को अबू धाबी और दुबई भेजा गया, जिससे किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में करीब 120 प्रतिशत तक अधिक कीमत मिली।
उत्तराखंड की हिमालयन लीची पहली बार इटली के बाजार में पहुंची, जबकि पंजाब की ताजा लीची भारत-ओमान व्यापार समझौते के तहत पहली बार ओमान भेजी गई।
GI उत्पादों की बढ़ी मांग
भारत के भौगोलिक संकेतक (GI Tag) वाले उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। असम की तेजपुर लीची दुबई पहुंची, जबकि मध्य प्रदेश के रीवा का प्रसिद्ध सुंदरजा आम संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया। इसके निर्यात से किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिला।
आंध्र प्रदेश के बंगनपल्ली आम को पहली बार समुद्री मार्ग से सिंगापुर भेजा गया, जिससे लंबी दूरी तक भारतीय फलों की गुणवत्ता बनाए रखने की क्षमता साबित हुई।
वाराणसी के बिस्कुट ने भी बनाया स्थान
कृषि उत्पादों के साथ-साथ प्रोसेस्ड फूड क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तैयार किए गए बिस्कुट को भारत-ओमान व्यापार समझौते के तहत ओमान भेजा गया है। इससे वाराणसी अब वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन रहा है।
केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि निर्यात में यह बढ़ोतरी किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारत को वैश्विक खाद्य बाजार में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।





