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किसानों को अंगूर से नहीं किशमिश से मुनाफे की उम्मीद

Bhumika Sahu
27 Jan 2022 5:51 AM GMT
किसानों को अंगूर से नहीं किशमिश से मुनाफे की उम्मीद
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किसानों को अंगूर से नहीं किशमिश से मुनाफा बढ़ने की उम्मीद है. इसिलए महाराष्ट्र के किसान सीधे अंगूर बेचने की बजाय उसे किसमिश बनवाने के लिए बेच रहे हैं. अंगूर संघ के अध्यक्ष का कहना हैं कि किसान ठंड से खराब हो रहे हैं अंगूर को किसमिश के लिए बेच रहे हैं.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जलवायु परिवर्तन का असर अब अंगूर (Grapes)उत्पादन को प्रभावित कर रहा है. साथ ही फलों की गुणवत्ता भी खराब हो रही है. जिसका असर रेट पर भी पड़ रहा हैं.तो वही दूसरी ओर किशमिश (Raisins) की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं.पिछले दो महीने से किशमिश मांग में काफी वृद्धि हुई हैं.लेकीन मौजूदा समय में जलवायु परिवर्तन (Climate Changes) के कारण अंगूर उत्पादन में गिरावट देखी जा रही हैं जिसके कारण किशमिश के उत्पादन में भी दिक्कत आ रही है और किशमिश व्यापारी (Raisin traders)नए माल का इंतजार कर रहे हैं.वर्तमान में किशमिश 120 रुपये से 230 रुपये प्रति किलो मिल रही अंगूर उत्पादक किसान संजय बालकृष्ण साठे नैताले ने बताया कि इस समय अंगूर उत्पादको सही भाव न मिलने से किसान अब दूसरा विकल्प देख रहे हैं वही कुछ किसान अंगूर सीधा किशमिश बनवाने के लिए बेच रहे हैं.हालाकि बारिश के कारण अंगूर उत्पादन में कमी भी देखी जा रही हैं जिसके कारण किशमिश व्यपारी डरे हुए हैं कि किशमिश की पूर्ति होगी या नहीं,कुछ व्यपारियों का कहना हैं कि फरवरी में नई किशमिश बाजार खुलने की उम्मीद हैं.

तो वही एक तरफ अंगूर की कीमत तय होने के बावजूद निर्यातक कम कीमतों की मांग कर रहे हैं.वही अंगूर संघ के अध्यक्ष कैलास भोसले सरोले ने बताया कि बदलते मौसम के कारण अंगूर उत्पादन को भारी नुकसान हुआ हैं इसिलए जो अंगूर ठंड और बारिश की वजह के कारण फट रहे हैं उन्हें किसान मजबूरन किशमिश बनवाने के लिए बेचने पड़ रहे हैं जिसका उन्हें 3से 5 रुपए प्रति किलो के कम दाम मिलता हैं.
बढ़ती मांग के बावजूद दरें स्थिर
पिछले साल 1 लाख 80 टन किशमिश का उत्पादन हुआ था .साल भर की मांग के चलते किशमिश कम और ज्यादा बिकती हैं लेकीन अब पिछले साल उत्पादित किशमिश लगभग खत्म हो चुकी हैं दिसंबर में किशमिश का भाव 160 रुपये से 225 रुपये प्रति किलो था हालांकि पिछले कुछ दिनों में देश में कोरोना का प्रकोप लाॅकडाउन,जैसा डर था हालांकि इसका मांग पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इससे कीमतों में बढ़ोतरी भी नहीं हुई हैं व्यापारी अब नई किशमिश का इंतजार कर रहे हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पादन में कमी का अनुमान लगाया जा रहा हैं.
किशमिश का उत्पादन देर से, लेकिन रेट बढ़ेंगे
किशमिश हर साल जनवरी के महीने में पैदा होता हैं इसके लिए शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती हैं.किशमिश व्यपारी सुशील हदारे का कहना हैं कि इस साल किशमिश का उत्पादन शुरू होते ही मौसम में भारी बदलाव आया है तो किशमिश के उत्पादन के सिलसिले में जो शेड बनाया गया था, वह अब भी वैसे ही पड़े हैं अब वास्तविक किशमिश उत्पादन अब फरवरी के मध्य से शुरू होगा हालांकि पिछले साल का भंडारण अंतिम चरण में हैं ऐसे में कई व्यापारी नई किशमिश का इंतजार कर रहे हैं इसलिए, अगर मांग उत्पादन से अधिक हो जाती है, तो कीमतें बढ़ जाएंगी,
आख़िर क्या है?स्थिति
फरवरी के अंतिम सप्ताह से किशमिश का उत्पादन शुरू हो जाएगा फिलहाल बचे हुए अंगूरों को बेचकर किशमिश बनाई जा रही हैं इसलिए किशमिश बनने की रफ्तार नहीं बढ़ी हैं कई इलाकों में शेड की मरम्मत कर दी गई है और शेड मालिक किशमिश तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि, मौसम ने उत्पादन को प्रभावित किया है और उम्मीद है कि शुष्क मौसम जल्द ही किशमिश के उत्पादन में तेजी लाएगा.


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