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फेसबुक यूजर्स के फोन नंबर और निजी जानकारी हुई लीक, भारत भी लिस्ट में शामिल

Chandravati Verma
4 April 2021 7:32 AM GMT
फेसबुक यूजर्स के फोन नंबर और निजी जानकारी हुई लीक, भारत भी लिस्ट में शामिल
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प्राइवेसी लीक का एक बेहद बड़ा मामला सामने आ रहा है जिसमें करोड़ों फेसबुक यूजर्स के डेटा लीक हो चुके हैं.

प्राइवेसी लीक का एक बेहद बड़ा मामला सामने आ रहा है जिसमें करोड़ों फेसबुक यूजर्स के डेटा लीक हो चुके हैं. तकरीबन 53.3 करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा को लीक किया जा चुका है. इस लीक में 106 देशों के यूजर्स का डेटा शामिल है जिसे हैक कर ऑनलाइन पोस्ट किया गया है. इस डेटा लीक में लोगों के फोन नंबर्स, फेसबुक आईडी, पूरा नाम, लोकेशन, बर्थ डेट और ईमेल एड्रेस शामिल है. इस लीक में अमेरिका के 3.2 करोड़ यूजर्स, यूके के 1.1 करोड़ यूजर्स, भारत के 60 लाख यूजर्स शामिल हैं.फेसबुक यूजर्स के फोन नंबर और निजी जानकारी हुई लीक, लिस्ट में भारत भी शामिल

बिजनेस इंसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार यूजर्स के डेटा में कई निजी जानकारियां भी शामिल हैं. फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा कि, करोड़ों यूजर्स का डेटा फेसबुक सर्वर से साल 2019 में लीक हुआ था जिसे हमने उसी साल ठीक कर दिया था. साइबरक्राइम इंटेलिजेंस हडसन रॉक के सीटीओ Alon Gal ने कहा कि, चाहे डेटा कई सालों पहले लीक हुआ हो लेकिन साइबरक्रिमिनल्स के लिए ये आज भी बेहद अहम जानकारी है जिसे ऑनलाइन लीक किया जा चुका है.

Gal ने आगे कहा कि, लोगों की निजी जानकारी की मदद से हैकर्स इसका फायदा उठाएंगे और आगे चलकर और साइबर अटैक करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि, फेसबुक फिलहाल इस मामले में अब ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है. लेकिन हां कंपनी को यहां जल्द से जल्द उन ओपन सोर्सेज पर रोक लगाना चाहिए जहां से डेटा लीक हो रहे हैं.
बता दें कि, लोगों की जानकारी की सुरक्षा को लेकर फेसबुक पर कई साल से सवाल उठते रहे हैं. सोशल मीडिया कंपनी ने 2018 में फोन नंबर के जरिए यूजर के खातों को खोजने की सुविधा इस खुलासे के बाद बंद कर दी थी कि राजनीतिक कंपनी 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' ने आठ करोड़ 70 लाख फेसबुक यूजर की जानकारी उनकी जानकारी या सहमति के बिना प्राप्त कर ली.
यह भारत में 10 दिनों के भीतर दूसरा ऐसा उदाहरण है जहां किसी कंपनी के उपयोगकर्ता डेटाबेस के लीक होने के दावे किए जा रहे हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में मंगलवार को गुड़गांव स्थित मोबाइल भुगतान और डिजिटल वॉलेट कंपनी मोबिक्विक के 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं के विवरण कथित रूप से लीक हो गए थे और उन्हें डार्कवेब पर बेचा जा रहा था.


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