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इकोनॉमिक रिकवरी के जोर पकड़ने के साथ उसे आने वाली तिमाहियों में मजबूत जीडीपी में बढ़ोतरी की उम्मीद : PHDCCI

Renuka Sahu
25 Oct 2021 3:54 AM GMT
इकोनॉमिक रिकवरी के जोर पकड़ने के साथ उसे आने वाली तिमाहियों में मजबूत जीडीपी में बढ़ोतरी की उम्मीद : PHDCCI
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फाइल फोटो 

उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई ने कहा कि इकोनॉमिक रिकवरी के जोर पकड़ने के साथ उसे आने वाली तिमाहियों में मजबूत जीडीपी में बढ़ोतरी की उम्मीद है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) ने कहा कि इकोनॉमिक रिकवरी के जोर पकड़ने के साथ उसे आने वाली तिमाहियों में मजबूत जीडीपी (GDP) में बढ़ोतरी की उम्मीद है. उद्योग मंडल द्वारा ट्रैक किए गए क्यूईटी (Quick Economic Trends) के 12 प्रमुख आर्थिक और कारोबारी संकेतकों में से 9 ने सितंबर 2021 में क्रमिक वृद्धि में तेजी दिखायी है जबकि अगस्त में 6 संकेतकों में ऐसा हुआ था.

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (Quick Economic Trends) के अध्यक्ष प्रदीप मुल्तानी ने कहा, हाल के महीनों में प्रमुख आर्थिक और कारोबारी संकेतकों में तेजी से पता चलता है कि आर्थिक पुनरुद्धार गति पकड़ रहा है और आने वाली तिमाहियों में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है. हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि इस समय, देश में खपत और निजी निवेश को समर्थन देने के लिए कच्चे माल की ऊंची कीमतों और कच्चे माल की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है.
सितंबर में आए मजबूत आंकड़े
पीएचडीसीसीआई ने कहा कि माल एवं वस्तु कर (GST) कलेक्शन, शेयर बाजार, यूपीआई लेनदेन (UPI Transaction) , निर्यात, विनिमय दर, विदेशी मुद्रा भंडार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति और बेरोजगारी दर ने अगस्त 2021 की तुलना में सितंबर 2021 में सकारात्मक क्रमिक वृद्धि दर्ज की है.
इसके अलावा, बेरोजगारी का परिदृश्य सितंबर 2021 में सुधरकर 6.9 प्रतिशत हो गया, जो उससे पिछले महीने में 8.3 प्रतिशत था.
PHDCCI ने कहा, स्टॉक मार्केट ने अगस्त 2021 में 55,238 से सितंबर 2021 में 58,781 की क्रमिक वृद्धि दर्ज की है. जीएसटी संग्रह ने अगस्त 2021 में 1,12,020 करोड़ रुपये से 4.5 फीसदी की क्रमिक वृद्धि दर्ज की है. सितंबर 2021 में जीएसटी कलेक्शन 1,17,010 करोड़ रुपये रहा.
मुल्तानी ने कहा कि आपूर्ति-पक्ष के मुद्दे जैसे हाई इनपुट कॉस्ट, कच्चे माल की कमी, उत्पादन संभावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं और व्यवसायों के मूल्य-लागत मार्जिन को कम कर रहे हैं.


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