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सस्ता सोना भी नहीं लुभा रहा खरीदारों को, गोल्ड डिमांड में बड़ी गिरावट
Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 3:27 PM IST

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बिज़नेस : सोने और चांदी की कीमतों में जारी भारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों से लेकर आम खरीदारों तक की चिंता बढ़ा दी है। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाले सोने और चांदी के दाम अब अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। सोना रिकॉर्ड स्तर से करीब 42 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी में 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सोने की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रही है।
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सोने की कुल मांग साल 2026 में छह साल के सबसे निचले स्तर तक पहुंच सकती है। ऊंची कीमतें, ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर आर्थिक स्थिति और गहनों की खरीद में कमी इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।
रिकॉर्ड ऊंचाई से कितना सस्ता हुआ सोना?
सोने की कीमतों में इस साल भारी गिरावट देखने को मिली है। जनवरी 2026 में सोने ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की थी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू बाजार में बिकवाली के दबाव के चलते कीमतों में गिरावट शुरू हुई।बाजार रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी में सोना करीब 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में लगभग 42,321 रुपये तक की कमी दर्ज की गई।हालांकि, यह गिरावट रिकॉर्ड उच्चतम स्तर की तुलना में है, न कि साल की शुरुआत से हर कारोबारी सत्र में लगातार हुई गिरावट।1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,40,054 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था।
चांदी में सोने से भी बड़ी गिरावट
चांदी की कीमतों में गिरावट सोने के मुकाबले कहीं अधिक तेज रही है।साल 2026 की शुरुआत में चांदी की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। जनवरी में इसके भाव 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर निकल गए थे।कुछ बाजार आंकड़ों के मुताबिक, चांदी ने लगभग 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।इसके बाद कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। नवंबर की शुरुआत तक चांदी का भाव लगभग 1.81 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया।इस तरह रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले चांदी करीब 2.41 लाख रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई।चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट ने उन निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी।
छह साल के निचले स्तर पर पहुंच सकती है मांग
सोने की कीमतों में इतनी गिरावट के बावजूद भारत में इसकी मांग कमजोर बनी हुई है।विश्व स्वर्ण परिषद ने अनुमान जताया है कि साल 2026 में भारत की सोने की कुल मांग लगभग 650 टन रह सकती है।यदि ऐसा होता है तो यह वर्ष 2020 के बाद सबसे कम वार्षिक मांग होगी।वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान देशभर में बाजार बंद होने और आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने के कारण सोने की मांग में बड़ी गिरावट आई थी।अब छह साल बाद एक बार फिर मांग के उसी स्तर के आसपास पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।विश्व स्वर्ण परिषद के भारत परिचालन प्रमुख सचिन जैन ने बताया कि ऊंची कीमतों के कारण आभूषणों की खरीद प्रभावित हुई है। निवेश के उद्देश्य से की जाने वाली खरीदारी में भी कमी आई है।
सितंबर तिमाही में 29 प्रतिशत घटी मांग
विश्व स्वर्ण परिषद की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट में भारतीय स्वर्ण बाजार की स्थिति सामने आई है।रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग लगभग 162.5 टन रही।यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 29 प्रतिशत कम है।इस दौरान आभूषणों की मांग में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।वहीं सोने की छड़ों और सिक्कों की निवेश मांग पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले करीब 40 प्रतिशत कम रही।हालांकि, अप्रैल-जून तिमाही के मुकाबले जुलाई-सितंबर में मांग में सुधार हुआ। इससे स्पष्ट है कि बाजार में खरीदारी पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
कीमतें गिरने के बावजूद ग्राहक क्यों नहीं खरीद रहे सोना?
सोने की मांग कमजोर रहने के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण हैं।सबसे बड़ा कारण यह है कि रिकॉर्ड ऊंचाई से कीमतें कम होने के बावजूद सोना पिछले साल की तुलना में अब भी महंगा है।विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में घरेलू सोने की औसत कीमत लगभग 1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।यह पिछले साल की समान अवधि से करीब 45 प्रतिशत अधिक थी।इसका मतलब है कि जिन ग्राहकों को पहले एक निश्चित बजट में अधिक वजन के आभूषण मिल जाते थे, अब उसी राशि में कम सोना मिल रहा है।दूसरी ओर, कई ग्राहक कीमतों में और गिरावट आने की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में वे खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल रहे हैं।
कमजोर मानसून ने ग्रामीण बाजार को किया प्रभावित
भारत में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से आता है।ग्रामीण परिवारों में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि बचत और आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी माना जाता है।विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, भारत की आधे से अधिक सोने की मांग ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी है।लेकिन साल 2026 में कमजोर मानसून के कारण कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित हुई है।इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों की खरीदारी क्षमता पर पड़ा है।इसके अलावा ईरान युद्ध के बाद बढ़ी जीवनयापन की लागत ने भी उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव डाला है।ऐसी स्थिति में कई परिवार सोने के आभूषण खरीदने के बजाय रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च को प्राथमिकता दे रहे हैं।
दिवाली और शादी के सीजन से बाजार को उम्मीद
सोने की मांग में आई गिरावट के बीच व्यापारियों को आगामी त्योहारों और शादी के सीजन से उम्मीद है।भारत में धनतेरस और दिवाली के अवसर पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है।इसके अलावा नवंबर और दिसंबर में विवाह समारोहों के चलते आभूषणों की खरीद बढ़ने की संभावना रहती है।विश्व स्वर्ण परिषद का अनुमान है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में त्योहारों और शादी के सीजन से मांग में सुधार हो सकता है।हालांकि, ऊंची कीमतें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति इस सुधार को सीमित कर सकती हैं।
क्या सोना और चांदी अभी और सस्ते होंगे?
सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की मांग से प्रभावित होती हैं।अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।आमतौर पर डॉलर मजबूत होने और बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न में बढ़ोतरी के दौरान सोने पर दबाव बन सकता है।हालांकि, वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षितनिवेश के रूप में सोने की ओर भी रुख कर सकते हैं।इसलिए आने वाले दिनों में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है।
विशेषज्ञ आम निवेशकों को केवल हालिया गिरावट देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचने और अपनी आर्थिक स्थिति तथा निवेश अवधि को ध्यान में रखने की सलाह देते हैं।
सोने का भाव गिरा, लेकिन खरीदारी का बजट अब भी बड़ा
सोने के बाजार में फिलहाल एक दिलचस्प स्थिति दिखाई दे रही है। कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे हैं, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अब भी महंगी बनी हुई हैं।यही कारण है कि रिकॉर्ड स्तर से 42 हजार रुपये की गिरावट के बावजूद ग्राहकों के लिए सोना खरीदना आसान नहीं हुआ है।दूसरी ओर, चांदी में भारी गिरावट के कारण निवेशकों के सामने नई अनिश्चितता पैदा हुई है।अब बाजार की नजर दिवाली, धनतेरस और शादी के सीजन पर टिकी है। इन अवसरों पर मांग में सुधार से कारोबारियों को राहत मिल सकती है।
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