
व्यापार | देश में रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं और लाखों नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रोजगार बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ महीनों में 42 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं, जिससे बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में श्रम भागीदारी दर (Labour Participation Rate) में भी गिरावट आई है। कंपनियों में छंटनी की संख्या बढ़ी है और नए रोजगार सृजन की दर धीमी पड़ गई है। खासकर, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और सेवा क्षेत्रों में नौकरियों पर सबसे अधिक असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक मंदी, महंगाई और बाजार में अस्थिरता जैसे कारक जिम्मेदार हैं। कई कंपनियां लागत में कटौती के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं। इसके अलावा, स्टार्टअप सेक्टर में फंडिंग की कमी भी एक प्रमुख कारण है, जिससे नई भर्तियों पर असर पड़ा है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार संकट
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घट रहे हैं। खासतौर पर असंगठित क्षेत्रों में नौकरियों की स्थिति ज्यादा खराब हुई है। इससे लाखों लोग अस्थायी और कम वेतन वाली नौकरियों की ओर बढ़ने को मजबूर हो रहे हैं।
सरकार के प्रयास और आगे की राह
सरकार ने हाल ही में विभिन्न रोजगार योजनाओं के तहत नए अवसर पैदा करने की कोशिश की है, लेकिन अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को स्वरोजगार और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि युवाओं को नए अवसर मिल सकें।
निष्कर्ष
CMIE की यह रिपोर्ट भारत में रोजगार के गिरते स्तर को लेकर चिंता बढ़ा रही है। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो देश में बेरोजगारी दर और बढ़ सकती है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और उद्योग जगत इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं।





