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वाशिंगटन: विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने चेतावनी दी है कि अगले 10 से 15 वर्षों में दुनिया के सामने लगभग 800 मिलियन (80 करोड़) नौकरियों की भारी कमी आ सकती है। उन्होंने तेजी से बढ़ती युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के वास्ते वैश्विक विकास वित्तपोषण (global development financing) में एक बुनियादी बदलाव की मांग की है।
बैंकॉक में विश्व बैंक समूह की 2026 की वार्षिक बैठक के पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में, बंगा ने कहा कि अगले 15 वर्षों में लगभग 1.2 बिलियन (120 करोड़) युवा वैश्विक कार्यबल (workforce) में शामिल होंगे, जबकि अनुमान है कि उस समय तक केवल 400 मिलियन (40 करोड़) नौकरियां ही उपलब्ध होंगी।
बंगा ने कहा, "नौकरियों की यह कमी सिर्फ एक अनुमान है। जरूरी नहीं कि हमारा भविष्य ऐसा ही हो।" उन्होंने आर्थिक विकास को तेज करने के लिए सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश, परोपकारी कार्यों और तकनीक को एक साथ लाने की एक महत्वाकांक्षी रणनीति पेश की।
उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार चल रहे संघर्ष, बढ़ता कर्ज का बोझ, सीमित वित्तीय गुंजाइश (fiscal space), और ऊर्जा तथा उर्वरकों की उच्च लागत विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस चुनौती को और भी कठिन बना रही है।
बंगा ने बताया कि जून 2023 में अपना पद संभालने के बाद से विश्व बैंक ने कई बड़े संस्थागत सुधार किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य ऋण देने की क्षमता बढ़ाना, नौकरशाही को कम करना और निजी पूंजी को जुटाना है।
परियोजना की तैयारी के समय को 19 महीने से घटाकर 9 महीने कर दिया गया है, जबकि संस्था के प्रदर्शन संकेतकों (performance indicators) की संख्या 153 से घटाकर 22 कर दी गई है।
इन सुधारों की बदौलत 'इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट' (IBRD) के पास एक दशक में 100 बिलियन डॉलर से अधिक की अतिरिक्त ऋण देने की क्षमता तैयार हुई है।
निजी पूंजी जुटाने का आंकड़ा वित्त वर्ष 2022 में लगभग 35 बिलियन डॉलर था, जो पिछले साल बढ़कर 112 बिलियन डॉलर हो गया—यानी इसमें तीन गुना वृद्धि हुई। विश्व बैंक समूह के अपने वित्तपोषण को मिला दें, तो कुल वित्तपोषण 230 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया।
इस संस्था द्वारा जुटाई गई निजी पूंजी के प्रमुख स्रोतों में भारत सबसे आगे रहा।
बंगा ने कहा, "पिछले साल हमने 110 देशों के निवेशकों से पूंजी जुटाई। इसमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और भारत सबसे आगे रहे।"
हालांकि, सबसे गरीब देशों में व्यावसायिक निवेश आकर्षित करना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। कम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी जुटाने का आंकड़ा लगभग 3 बिलियन डॉलर तक ही सीमित रहा। बंगा ने कहा कि यह संस्था सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर अधिक जोर दे रही है, खासकर उन कमजोर और संघर्ष-प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं में, जहां बड़ी कंपनियों का कामकाज अक्सर सीमित होता है।
पिछले साल, इस संस्था ने बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास के लिए 40 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए दिए गए वित्तपोषण का 30 प्रतिशत हिस्सा नीतिगत और संस्थागत सुधारों के समर्थन में इस्तेमाल किया गया।
बंगा ने विकास के एक उभरते हुए साधन के रूप में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) पर भी प्रकाश डाला।
हालांकि उन्नत AI प्रणालियों के लिए महंगे कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे और विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, लेकिन छोटे AI एप्लिकेशन किसानों को उत्पादकता बढ़ाने, शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से पढ़ाने और उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।
ऊर्जा के क्षेत्र में, उन्होंने बताया कि 'मिशन 300' के तहत 59 मिलियन अफ्रीकी लोगों को बिजली की सुविधा मिली है। इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक 300 मिलियन लोगों को बिजली से जोड़ना है।
विश्व बैंक की योजना अगले पांच वर्षों में अपने 'क्रिटिकल मिनरल्स' (महत्वपूर्ण खनिजों) से जुड़े कारोबार को पांच गुना बढ़ाने की भी है, जिससे स्थानीय उद्योगों को समर्थन मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
बंगा ने छह बहुपक्षीय विकास बैंकों द्वारा किए जा रहे उन प्रयासों की घोषणा की, जिनका उद्देश्य निवेश की पैकेजिंग और हस्तांतरण को मानकीकृत (standardize) करना है। इससे संस्थागत निवेशक मौजूदा परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगे, जिससे विकास बैंकों की पूंजी नई परियोजनाओं के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
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