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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार तेज, 2025 में EV बिक्री 23 लाख यूनिट के पार

Kavita2
5 Aug 2026 5:37 PM IST
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार तेज, 2025 में EV बिक्री 23 लाख यूनिट के पार
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नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ता रुझान अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016 में जहां देश में करीब 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 23 लाख यूनिट (2.3 मिलियन) तक पहुंच गया। यह करीब 46 गुना की वृद्धि है।

सरकार के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2034 तक भारतीय EV बाजार 54.94 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ बढ़कर 191.04 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि दर वैश्विक स्तर के मुकाबले काफी तेज रही है। जहां दुनिया भर में EV बिक्री वर्ष 2016 में करीब 9.18 लाख यूनिट थी, जो 2024 में बढ़कर 1.87 करोड़ यूनिट (18.78 मिलियन) हो गई। यानी वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में करीब 20 गुना वृद्धि हुई है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की कोशिश, प्रदूषण नियंत्रण, नई तकनीक को बढ़ावा और सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं प्रमुख हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों के चलते इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन मिला है।

सरकार लगातार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, बैटरी तकनीक को मजबूत करने और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि EV क्षेत्र में तेजी आने से ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ-साथ बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और संबंधित क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

भारत में दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में विशेष तेजी देखने को मिली है। कम परिचालन लागत और ईंधन खर्च में बचत के कारण बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर और अन्य छोटे वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक कारों की मांग भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।

सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी तेल आयात पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

ऑटोमोबाइल कंपनियां भी EV क्षेत्र में बड़े निवेश कर रही हैं। कई कंपनियों ने नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च किए हैं और आने वाले वर्षों के लिए नई तकनीकों पर काम कर रही हैं। बैटरी की क्षमता बढ़ाने, चार्जिंग समय कम करने और वाहनों की कीमतों को अधिक किफायती बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। चार्जिंग स्टेशनों की पर्याप्त उपलब्धता, बैटरी की लागत, रीसाइक्लिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाना अभी भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। सरकार और उद्योग जगत इन चुनौतियों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में इलेक्ट्रिक वाहन भारत के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बढ़ती बिक्री और निवेश से यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला सेक्टर बन सकता है।

भारत में EV की बढ़ती लोकप्रियता यह संकेत देती है कि देश धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों से स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर सरकार, उद्योग और उपभोक्ताओं की भूमिका इस बदलाव को और गति दे सकती है।

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