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El Nino बदलेगा बाजार का खेल, अमेरिका की नजर इस सेक्टर पर

Saba Naaz
16 July 2026 4:27 PM IST
El Nino बदलेगा बाजार का खेल, अमेरिका की नजर इस सेक्टर पर
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नई दिल्ली। मौसम में बदलाव और अलनीनो (El Nino) के प्रभाव का असर भारत के कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। इस साल खरीफ फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। खासतौर पर कपास जैसी प्रमुख औद्योगिक फसल की खेती में कमी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर कपास उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में भारत को कपास आयात बढ़ाना पड़ सकता है। इस स्थिति में अमेरिका को भारत में अपने कपास निर्यात के लिए एक बड़ा अवसर दिखाई दे रहा है।

अमेरिकी कपास उद्योग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि भारत आने वाले समय में अमेरिकी कपास के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है। नेशनल कॉटन काउंसिल ऑफ अमेरिका के अध्यक्ष और सीईओ गैरी एडम्स ने कहा है कि भारत में कपास की मांग और उत्पादन की स्थिति को देखते हुए अमेरिका यहां अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना देख रहा है।

कपास भारत की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है। इसका इस्तेमाल कपड़ा उद्योग, धागा निर्माण और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। भारत दुनिया के बड़े कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन मौसम संबंधी चुनौतियों, उत्पादन लागत और खेती के रकबे में बदलाव के कारण घरेलू उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

इस साल अलनीनो के प्रभाव के कारण मौसम का संतुलन प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में बारिश की स्थिति सामान्य नहीं रही, जिसका असर किसानों के फैसलों पर पड़ा है। कुछ इलाकों में किसानों ने कपास की जगह दूसरी फसलों को प्राथमिकता दी है। इसके चलते कपास की बुवाई का क्षेत्रफल घटने की संभावना जताई जा रही है।

कपास उत्पादन में कमी आने पर भारत की कपड़ा इंडस्ट्री को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका भारत को अपने कपास के लिए एक बड़े बाजार के रूप में देख रहा है। अमेरिकी कपास उत्पादकों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत से उनकी खरीदारी बढ़ सकती है।

गैरी एडम्स के अनुसार, भारत पहले से ही अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और बढ़ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2026 तक भारत अमेरिकी कपास के प्रमुख आयातकों में शामिल हो सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही मजबूत है। दोनों देशों के बीच कई कृषि उत्पादों को लेकर व्यापारिक संबंध हैं। कपास के क्षेत्र में भी अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कपास आयात बढ़ने का फैसला केवल उत्पादन की कमी पर निर्भर नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय कीमतें, घरेलू मांग, किसानों की स्थिति और सरकार की व्यापार नीतियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अगर घरेलू उत्पादन में सुधार होता है तो आयात की जरूरत कम हो सकती है।

कपड़ा उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। भारत का कपड़ा क्षेत्र देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में कपास की कीमत और उपलब्धता का असर पूरे उद्योग पर पड़ सकता है।

अमेरिका के लिए भारत का बाजार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कपास की मांग लगातार बनी हुई है। यदि भारत में उत्पादन कम होता है और आयात की जरूरत बढ़ती है तो अमेरिकी किसानों और निर्यातकों को इसका फायदा मिल सकता है।

फिलहाल अलनीनो के प्रभाव और कपास उत्पादन की स्थिति पर कृषि विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। आने वाले महीनों में बुवाई, उत्पादन और बाजार की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि भारत को कितनी मात्रा में कपास आयात करने की जरूरत पड़ेगी। वहीं, अमेरिका इस संभावित अवसर को अपने कपास निर्यात को बढ़ाने के मौके के रूप में देख रहा है।

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