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रिलायंस कम्युनिकेशंस केस में ED की नई चार्जशीट

Ratna Netam
9 Aug 2026 8:15 PM IST
रिलायंस कम्युनिकेशंस केस में ED की नई चार्जशीट
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नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और उससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ चल रहे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में एक **पूरक अभियोजन शिकायत** दाखिल की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस शिकायत में मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी और जांच के दौरान सामने आए कई अहम तथ्यों को शामिल किया गया है। ईडी ने यह कार्रवाई 27 मार्च को दाखिल की गई पहली अभियोजन शिकायत के क्रम में की है।
ईडी के अनुसार, आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला समेत अन्य को पीएमएलए की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने मामले में अपराध से हासिल रकम का मूल्य **40,185.55 करोड़ रुपये** आंका है। एजेंसी का कहना है कि यह वह कुल बकाया रकम है, जिसका भुगतान संबंधित कंपनियों की ओर से कंसोर्टियम बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डधारकों को नहीं किया गया।
ईडी ने अपनी जांच में फंड जुटाने, उनके इस्तेमाल, कथित तौर पर रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाने और वास्तविक उपयोग को छिपाने से जुड़ी गतिविधियों का पता चलने का दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है। इनमें विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड यानी एफसीसीबी के जरिए जुटाई गई करीब **1 अरब डॉलर की रकम** के अंतिम इस्तेमाल को लेकर कथित गलत प्रमाणन का मामला भी शामिल है।
जांच एजेंसी ने न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा अटैच और कन्फर्म की गई करीब **8,078.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों** को जब्त करने की मांग भी की है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में मौजूद लीजहोल्ड तथा अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के मुताबिक, मामले में गौतम दोषी को 12 जून और सतीश सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत ने इस मामले में मुख्य अभियोजन शिकायत का संज्ञान 15 जून को लिया था। ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के आधार पर सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के बाद हुई। इन एफआईआर में आरकॉम, आरटीएल और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड द्वारा कथित तौर पर फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं का गलत तरीके से लाभ उठाने तथा रकम के डायवर्जन से जुड़े आरोप शामिल थे।
ईडी की जांच में कई आपस में जुड़े लेनदेन सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, स्वीकृत उद्देश्य के बजाय नई क्रेडिट सुविधाओं का कथित तौर पर पुरानी घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, रकम को एक व्यवस्था से दूसरी व्यवस्था में घुमाने और पुराने कर्ज को लगातार नवीनीकृत करने के लिए इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में रकम को ग्रुप कंपनियों, विशेष उद्देश्य वाली कंपनियों, अलग-अलग बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड के जरिए घुमाया गया।
ईडी के अनुसार, इन फंड का इस्तेमाल पुरानी एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग यानी ईसीबी और एफसीसीबी से जुड़ी देनदारियों के भुगतान में किया गया। इसके अलावा कथित लेनदेन को वैध कारोबारी खर्च या प्राप्ति के रूप में दिखाने की कोशिश किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। एजेंसी का कहना है कि कथित वित्तीय गतिविधियों का सिलसिला काफी पुराना है और इसकी शुरुआत कम से कम वर्ष **2007** से होने के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि लोन से प्राप्त रकम को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड समेत कुछ अन्य ग्रुप कंपनियों में डायवर्ट किया गया। इसके अलावा ईडी ने प्रमोटरों के लिए भारत के बाहर निजी संपत्तियां खरीदने और आरकॉम के मुनाफे को कथित तौर पर कृत्रिम तरीके से बढ़ाने के लिए भी रकम के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
फिलहाल इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और ईडी की आगे की जांच भी चल रही है। पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद अब मामले में जांच के दौरान सामने आए अतिरिक्त तथ्यों और संपत्तियों से जुड़े दावों पर अदालत में आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि, ईडी की ओर से लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आरोपियों की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही तय होगी।
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