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ED ने ज़ेप्टो फाउंडर्स को FEMA जांच में समन भेजा, IPO डॉक्यूमेंट में खुलासा

Kavita2
9 Jun 2026 12:11 PM IST
ED ने ज़ेप्टो फाउंडर्स को FEMA जांच में समन भेजा, IPO डॉक्यूमेंट में खुलासा
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Business बिजनेस: क्विक कॉमर्स कंपनी ज़ेप्टो के को-फाउंडर आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा को इस साल अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से समन जारी किया गया था। यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत चल रही जांच के सिलसिले में की गई थी, जिसमें कंपनी से जुड़े विदेशी निवेश और वित्तीय लेन-देन की जांच शामिल है।

कंपनी द्वारा जारी किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) में इस बात का खुलासा किया गया है कि ED ने समन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण वित्तीय और व्यावसायिक दस्तावेज़ों की मांग की थी। इनमें विदेशी और ओवरसीज़ निवेश से जुड़ी जानकारी, वित्तीय वर्ष 2021 से ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, लोन और गारंटी से संबंधित विवरण, इनकम टैक्स रिटर्न, बैंक अकाउंट डिटेल्स और कंपनी की संपत्तियों की जानकारी शामिल थी।

इसके अलावा, एजेंसी ने कंपनी के बिज़नेस मॉडल और संचालन से जुड़े विस्तृत दस्तावेज़ भी मांगे थे ताकि विदेशी निवेश और फंड फ्लो की पूरी जांच की जा सके। ED की यह कार्रवाई कंपनी के प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से कुछ महीने पहले सामने आई है, जिससे इस मामले को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों फाउंडर्स जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश हुए और आवश्यक दस्तावेज़ एवं जानकारी उपलब्ध कराई। कैवल्य वोहरा 17 अप्रैल और 22 अप्रैल को ED अधिकारियों के समक्ष उपस्थित हुए, जबकि आदित पालिचा 20 अप्रैल और 15 मई को पूछताछ के लिए पेश हुए।

जांच के दौरान दोनों ने कंपनी की होल्डिंग स्ट्रक्चर, स्कीम ऑफ अरेंजमेंट, बिज़नेस एग्रीमेंट और इनवॉइस से संबंधित अतिरिक्त जानकारी भी एजेंसी को सौंपी। ED का मुख्य फोकस कंपनी के विदेशी निवेश के स्रोत और फंड के उपयोग की प्रक्रिया पर बताया जा रहा है।

UDRHP में दी गई जानकारी के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि ज़ेप्टो अब नियामकीय प्रक्रियाओं और निवेश संबंधी जांच के दायरे में है, जो किसी भी IPO से पहले एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जांच कंपनियों के पारदर्शी वित्तीय संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी होती है। हालांकि, इससे निवेश प्रक्रिया और बाजार की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल कंपनी की ओर से इस मामले में कोई अतिरिक्त सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन IPO प्रक्रिया के चलते इस जांच पर बाजार की नजर बनी हुई है।

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