Stock बाजार में घरेलू निवेशकों का दम, विदेशी बिकवाली हुई बेअसर

New Delhi नई दिल्ली : वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) का मजबूत समर्थन मिला है। बीते सप्ताह घरेलू संस्थागत निवेशकों की जोरदार खरीदारी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी निकासी के असर को काफी हद तक कम कर दिया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय शेयर बाजार की मजबूती का संकेत दे रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, बीते सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे। एफआईआई ने बाजार से करीब 8,743.35 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं, निवेश रणनीतियों में बदलाव और अन्य बाजारों में अवसरों की तलाश के कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिली।
हालांकि, इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में भरोसा बनाए रखा। डीआईआई ने बीते सप्ताह करीब 8,790.75 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू निवेशकों की इस मजबूत खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की निकासी की लगभग पूरी भरपाई कर दी। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली और बाजार ने अपनी मजबूती बनाए रखी।
सप्ताह के अंत में प्रमुख सूचकांक निफ्टी 24,334.30 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार के जानकारों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। एफआईआई की बिकवाली के बावजूद बाजार में ज्यादा दबाव नहीं आया, जो घरेलू पूंजी की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की भूमिका लगातार बढ़ी है। म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड और अन्य घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार में नियमित निवेश कर रहे हैं। इससे विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर पहले की तुलना में कम हुआ है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की खरीद और बिक्री कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। इनमें अमेरिका की ब्याज दरें, वैश्विक आर्थिक स्थिति, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल हैं। जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है तो विदेशी निवेशक अक्सर उभरते बाजारों से पैसा निकालने की रणनीति अपनाते हैं।
वहीं, घरेलू निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की संभावनाओं को देखते हुए निवेश जारी रखते हैं। मजबूत घरेलू मांग, कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन और आर्थिक विकास की उम्मीदों के कारण घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी बाजार की दिशा तय करने में एफआईआई और डीआईआई दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।
हालांकि, निवेशकों को वैश्विक संकेतों और बाजार की परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनाना बेहतर माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बीते सप्ताह का बाजार प्रदर्शन यह दिखाता है कि भारतीय शेयर बाजार अब केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की बढ़ती ताकत बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय इक्विटी बाजार के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।





