
व्यापार | कोविड-19 महामारी के बाद, डिजिटल पेमेंट्स ने बडे़ पैमाने पर बढ़त हासिल की है, और यह भारतीय भुगतान प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है। महामारी ने ऑनलाइन लेन-देन को बढ़ावा दिया, क्योंकि लोग घर से बाहर जाने से बचने की कोशिश कर रहे थे और संपर्क रहित भुगतान की ओर रुझान बढ़ा। हालांकि, इस उभार के बावजूद, कुछ चुनौतियां और खामियां अब भी मौजूद हैं।
भारत में डिजिटल पेमेंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), एनईएफटी, और आधार-लिंक्ड पेमेंट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स ने आम जनता के बीच त्वरित और आसान ट्रांजेक्शन को लोकप्रिय किया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में डिजिटल पेमेंट्स का आंकड़ा 100 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, और 2020 के मुकाबले 2022 में डिजिटल भुगतान की कुल संख्या में 30% से अधिक की वृद्धि हुई। खासतौर पर यूपीआई ने डिजिटल भुगतान की दिशा में क्रांति ला दी है, जहां पेमेंट्स ने एक साधारण मोबाइल ऐप के जरिए किए जाने लगे।
नकद की वापसी
हालांकि डिजिटल पेमेंट्स की सफलता के बावजूद, नकद भुगतान का महत्व अब भी कायम है। रिपोर्टों के अनुसार, नकद लेन-देन की संख्या महामारी के बाद बढ़ी है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में। लोग नकद में भुगतान करने में अधिक आरामदायक महसूस करते हैं, क्योंकि वहाँ इंटरनेट की सुविधा सीमित होती है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लेन-देन करने का विश्वास उतना मजबूत नहीं होता है।
चुनौतियां और खामियां
डिजिटल पेमेंट्स की वृद्धि के बावजूद, कुछ प्रमुख चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। इनमें से सबसे बड़ी चुनौती है साइबर सुरक्षा। जैसे-जैसे लोग अधिक से अधिक ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं, वैसे-वैसे उनकी जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। फिशिंग स्कैम्स, हैकिंग, और डेटा चोरी के मामले बढ़े हैं, जिससे लोग ऑनलाइन पेमेंट्स के प्रति थोड़े संकोचित हो रहे हैं।
इसके अलावा, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की गति धीमी रहती है और तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण लोग डिजिटल पेमेंट्स से दूर रहते हैं।
अंतिम शब्द
समग्र रूप से देखा जाए तो महामारी के बाद डिजिटल पेमेंट्स ने भारत में एक नया युग शुरू किया है। इसके बावजूद, नकद भुगतान की वापसी और डिजिटल पेमेंट्स से जुड़ी कुछ खामियां यह संकेत देती हैं कि भारतीय भुगतान प्रणाली में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कदमों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के विश्वास को बढ़ाना इस दिशा में अहम होगा।





