
नई दिल्ली। भारत की स्पेस टेक और डिफेंस इंटेलिजेंस कंपनी दिगंतरा ने अंतरिक्ष निगरानी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए मंगलवार को MOSAIC (Multisensor Orbital Surveillance and Intelligence Capability) पेश किया। यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिस्ट्रिब्यूटेड ऑप्टिकल सेंसर नेटवर्क है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद वस्तुओं की लगातार और रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।
कंपनी के अनुसार, MOSAIC को पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है और यह देश की स्वदेशी स्पेस डोमेन अवेयरनेस (Space Domain Awareness) क्षमता को मजबूत करेगा। इस प्रणाली का उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों, मलबे और अन्य ऑर्बिटल ऑब्जेक्ट्स की निगरानी को अधिक तेज, सटीक और आत्मनिर्भर बनाना है।
विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश
दिगंतरा ने कहा कि लंबे समय से दुनिया में स्पेस सर्विलांस सिस्टम कुछ सीमित विदेशी स्वामित्व वाले फिक्स्ड सेंसर नेटवर्क पर निर्भर रहे हैं। इन प्रणालियों के जरिए अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की जानकारी तो मिलती रही है, लेकिन कई बार डेटा उपलब्धता और समय पर सूचना मिलने को लेकर सीमाएं भी सामने आती रही हैं।
कंपनी का दावा है कि MOSAIC इस चुनौती को दूर करने के लिए तैयार किया गया है। यह एक ऐसी स्वदेशी प्रणाली है जो लगातार काम कर सकती है और महत्वपूर्ण ऑर्बिटल गतिविधियों की जानकारी समय पर उपलब्ध करा सकती है।
LEO ऑर्बिट की रियल टाइम निगरानी
लो अर्थ ऑर्बिट यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में हजारों उपग्रह और अन्य अंतरिक्ष वस्तुएं मौजूद हैं। यहां बढ़ती गतिविधियों के कारण निगरानी और ट्रैकिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
MOSAIC का उद्देश्य LEO में मौजूद ऑब्जेक्ट्स की स्थिति, गति और गतिविधियों की जानकारी जुटाना है। AI तकनीक की मदद से यह सेंसर नेटवर्क बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर सकता है और संभावित खतरों या बदलावों की पहचान में सहायता कर सकता है।
डिफेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण क्षमता
स्पेस डोमेन अवेयरनेस आज दुनिया भर के देशों के लिए रणनीतिक महत्व का विषय बन चुका है। सैन्य संचार, नेविगेशन और निगरानी जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों पर निर्भर हैं।
ऐसे में अंतरिक्ष में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या उपग्रहों की स्थिति में बदलाव की जानकारी समय पर मिलना बेहद जरूरी है। MOSAIC जैसी प्रणाली भारत की रक्षा तैयारियों और अंतरिक्ष सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित
दिगंतरा ने बताया कि MOSAIC को भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह प्रणाली देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली पहल है।
स्वदेशी रूप से विकसित इस नेटवर्क के जरिए भारत को अंतरिक्ष निगरानी के लिए विदेशी कमर्शियल प्रोवाइडर्स पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। खासकर उन परिस्थितियों में जब तेजी से निर्णय लेने के लिए तुरंत और भरोसेमंद डेटा की जरूरत होती है।
AI की मदद से बेहतर डेटा विश्लेषण
MOSAIC की सबसे बड़ी विशेषता इसका AI आधारित विश्लेषण सिस्टम है। अंतरिक्ष में मौजूद ऑब्जेक्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे डेटा की मात्रा भी तेजी से बढ़ रही है।
AI तकनीक इस बड़े डेटा को तेजी से प्रोसेस करने में मदद करती है। इससे संभावित टकराव, ऑर्बिटल बदलाव और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों को समझने में सहायता मिल सकती है।
भारत के स्पेस इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
भारत पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने के साथ स्पेस टेक्नोलॉजी में नए प्रयोग हो रहे हैं।
दिगंतरा जैसी कंपनियां स्पेस सर्विलांस, डिफेंस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम कर भारत की क्षमता को विस्तार दे रही हैं। MOSAIC का लॉन्च इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भविष्य की अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए अहम कदम
दिगंतरा के अनुसार, आने वाले समय में अंतरिक्ष गतिविधियां और बढ़ेंगी। ऐसे में मजबूत स्पेस डोमेन अवेयरनेस सिस्टम किसी भी देश की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
MOSAIC भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने और रणनीतिक जानकारी पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी AI आधारित स्पेस सर्विलांस सिस्टम भारत की रक्षा क्षमता के साथ-साथ वैश्विक स्पेस टेक्नोलॉजी क्षेत्र में देश की भूमिका को भी मजबूत कर सकता है।





