
Business: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि आयोग ने अभी अपनी सिफारिशें जारी नहीं की हैं, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने अभी से अपनी मांगें रखना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) की गणना के मौजूदा तरीके पर सवाल उठाए हैं और इसे बदलने की मांग की है।
फेडरेशन का कहना है कि मौजूदा DA/DR सिस्टम कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ने वाले वास्तविक महंगाई के बोझ को सही तरीके से नहीं दर्शाता। वर्तमान में केंद्र सरकार DA और DR की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर करती है। इसमें पिछले 12 महीनों के औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को शामिल किया जाता है, ताकि महंगाई के असर को संतुलित किया जा सके।
AIDEF का तर्क है कि हाल ही में संशोधित CPI बास्केट में जरूरी वस्तुओं, खासकर खाद्य पदार्थों का वजन कम कर दिया गया है, जिससे आम कर्मचारी की वास्तविक खर्च स्थिति सही तरीके से सामने नहीं आती। संगठन के अनुसार 2012 के CPI बास्केट में खाद्य एवं पेय पदार्थों का भार 45.86 प्रतिशत था, जो 2022-23 में घटकर 36.75 प्रतिशत रह गया है। इसके उलट आवास, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं का भार बढ़ा दिया गया है।
फेडरेशन का कहना है कि आम कर्मचारी और पेंशनर अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन, दवाइयों, इलाज, किराया और बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं। ऐसे में खाद्य वस्तुओं का भार घटाने से महंगाई का वास्तविक असर कम दिखाई देता है, जबकि जमीन पर खर्च लगातार बढ़ रहा है।
पेंशनर्स की स्थिति को लेकर भी AIDEF ने चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, दवाइयां और देखभाल का खर्च काफी बढ़ जाता है। लेकिन मौजूदा DR व्यवस्था इन बढ़ते खर्चों को पूरी तरह कवर नहीं कर पाती, जिससे उनकी क्रय शक्ति प्रभावित होती है।
इसी को देखते हुए AIDEF ने 8वें वेतन आयोग से एक नया “कर्मचारी-केंद्रित कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स” बनाने की मांग की है। उनका सुझाव है कि इस नए इंडेक्स में भोजन, स्वास्थ्य, दवाइयां और जरूरी सेवाओं को अधिक महत्व दिया जाए, ताकि वास्तविक महंगाई का सही आकलन हो सके और DA/DR उसी के अनुसार तय किया जाए।
फिलहाल 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशों का इंतजार है। माना जा रहा है कि वेतन संशोधन और फिटमेंट फैक्टर जैसे बड़े फैसले 2027 के बाद सामने आ सकते हैं। ऐसे में DA और DR की गणना को लेकर उठी यह मांग आने वाले समय में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है, जो लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को प्रभावित करेगी।





