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IRCTC प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न का बोलबाला, 70% यूजर्स परेशान
Tara Tandi
26 Aug 2026 4:48 PM IST

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नई दिल्ली: इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को टिकट बुक करने और कैंसिल करने के दौरान कई तरह की डिजिटल दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोकलसर्कल्स के एक नए सर्वे में कई तरीकों को संभावित "डार्क पैटर्न" बताया गया है, जो ग्राहकों की पसंद को प्रभावित या बाधित कर सकते हैं।
इस सर्वे में 324 जिलों के यूज़र्स से 90,000 से ज़्यादा जवाब मिले। इसमें पाया गया कि 70 प्रतिशत लोगों को IRCTC प्लेटफॉर्म पर 'फोर्स्ड एक्शन' (मजबूरी में कोई काम करना) का अनुभव हुआ। 46 प्रतिशत यूज़र्स ने 'नैगिंग' (बार-बार परेशान करने वाले प्रॉम्प्ट) की शिकायत की, जबकि 45 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें 'बास्केट स्नीकिंग' (बिना जानकारी के कार्ट में चीज़ें जुड़ जाना) का सामना करना पड़ा। इन नतीजों की तुलना सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा बताए गए 13 तरह के डार्क पैटर्न से की गई।
'फोर्स्ड एक्शन' सबसे ज़्यादा बताई गई समस्या थी। IRCTC बुकिंग के मामले में, लोगों ने मुख्य रूप से इस समस्या को टिकट बुक करते समय बिना किसी साफ़ वजह के अपने अकाउंट से लॉग-आउट हो जाने से जोड़ा।
लगभग 42 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ऐसा लॉग-आउट बहुत बार होता है, जबकि 28 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें कभी-कभी ऐसा अनुभव हुआ। लगभग 15 प्रतिशत ने बताया कि उन्हें यह समस्या कभी-कभार हुई, जबकि इतने ही लोगों ने कहा कि उन्हें कभी ऐसा अनुभव नहीं हुआ।
अचानक लॉग-आउट हो जाना उन यात्रियों के लिए बहुत परेशानी वाला हो सकता है जो समय-सीमा के अंदर रिज़र्वेशन करा रहे हैं, क्योंकि उन्हें बुकिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ सकती है और उनकी पसंदीदा सीट या ट्रेन छूटने का खतरा हो सकता है।
सर्वे में 'नैगिंग' को भी एक और आम समस्या बताया गया। लगभग 46 प्रतिशत लोगों ने कहा कि टिकट बुक या कैंसिल करते समय उन्हें बार-बार प्रॉम्प्ट या रुकावट का सामना करना पड़ा। इन प्रॉम्प्ट में IRCTC ऐप डाउनलोड करने, अतिरिक्त निजी जानकारी देने या नोटिफिकेशन्स चालू करने के अनुरोध शामिल थे।
45 प्रतिशत लोगों ने 'बास्केट स्नीकिंग' की शिकायत की। सर्वे के अनुसार, यूज़र्स को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा जहाँ बुकिंग प्रक्रिया के दौरान उनकी साफ़ मंज़ूरी के बिना अतिरिक्त उत्पाद या सेवाएँ (जैसे बीमा, दान या पैसे वाली सेवाएँ) जोड़ दी गईं।
रिपोर्ट में 'ड्रिप प्राइसिंग' (शुरुआत में पूरी कीमत न बताकर बाद में अतिरिक्त शुल्क जोड़ना) पर भी चिंता जताई गई। 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें टिकट बुकिंग या कैंसिलेशन के दौरान टैक्स के अलावा ऐसे शुल्क का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में शुरुआत में साफ़ तौर पर नहीं बताया गया था।
वहीं, 31 प्रतिशत यूज़र्स ने 'इंटरफ़ेस इंटरफेरेंस' (इंटरफ़ेस में रुकावट) की शिकायत की, जहाँ बुकिंग स्क्रीन में रुकावट आई और खरीदने के लिए कोई दूसरा उत्पाद या सेवा दिखाई गई। 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें 'बेट एंड स्विच' (bait and switch) का अनुभव हुआ है। इसका मतलब है कि आखिर में जो टिकट, ट्रेन या सीट बुक हुई, वह वैसी नहीं थी जैसी उन्होंने शुरू में मांगी थी।
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