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ईरान-तनाव के बीच कच्चे तेल के दामों में उछाल, चार हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंचा ब्रेंट क्रूड

Kavita2
14 July 2026 10:43 AM IST
ईरान-तनाव के बीच कच्चे तेल के दामों में उछाल, चार हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंचा ब्रेंट क्रूड
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नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम करीब 2 प्रतिशत तक चढ़ गए।

मंगलवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 1.68 डॉलर यानी लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 84.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह पिछले चार हफ्तों में ब्रेंट का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी तेजी देखने को मिली। WTI क्रूड 1.65 डॉलर यानी 2.1 प्रतिशत बढ़कर 79.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

तेल बाजार में यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण आई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या रुकावट की आशंका से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार तुरंत प्रभावित होता है।

पिछले कारोबारी सत्र में भी ब्रेंट क्रूड में भारी उछाल दर्ज किया गया था। ब्रेंट की कीमतों में 9.6 प्रतिशत की दैनिक बढ़ोतरी हुई, जो लंबे समय बाद सबसे बड़ी एक दिन की तेजी में शामिल रही। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।

तेल बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा कारण यह है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति से नहीं बल्कि भू-राजनीतिक घटनाओं से भी प्रभावित होती हैं। मध्य पूर्व में किसी भी बड़े संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर मतभेद बने हुए हैं। हाल के घटनाक्रमों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस स्तर तक पहुंचता है। यदि स्थिति बिगड़ती है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

दूसरी ओर, अगर दोनों देशों के बीच बातचीत या तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशक किसी भी नए घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव महत्वपूर्ण होता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों में तेजी का असर घरेलू ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

फिलहाल तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम ही बाजार की दिशा तय करेंगे।

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