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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते, सोमवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की वैश्विक कीमतों में गिरावट आई। हाल ही में ये कीमतें लगभग छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि, प्रमुख उत्पादक देश सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के कारण निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत सुबह 10:20 बजे तक 2.29 प्रतिशत या 2.68 डॉलर गिरकर 114.04 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। उस समय यह 1.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 114.44 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
इसी तरह, अमेरिकी 'वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट' (WTI) की कीमत 2.49 प्रतिशत या 2.58 डॉलर गिरकर 100.69 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
सप्लाई को लेकर चिंताओं के कारण इस साल ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 90 प्रतिशत की तेजी आई थी, जिसके बाद अब इनमें गिरावट देखी गई है। शुक्रवार को कीमतें अप्रैल के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। ऐसा उन खबरों के बीच हुआ, जिनमें कहा गया था कि नवंबर की शुरुआत में अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद, अमेरिका और इज़राइल ईरान पर हमले की तैयारी कर सकते हैं। कमोडिटी मार्केट के जानकारों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। हाल ही में कीमतें काफी ऊपर चली गई थीं, लेकिन अब इनमें गिरावट आई है। यह गिरावट ऐसे समय में हुई है जब इस बात का डर बना हुआ है कि इस हफ्ते इजरायली चुनावों और अगले हफ्ते अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ हमले फिर से शुरू हो सकते हैं।
जानकारों ने आगे बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा कि वे जल्द ही तय करेंगे कि तेहरान के साथ कोई समझौता करना है या फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करनी है। वहीं, मध्य पूर्व में ईरान और हूती विद्रोहियों की ओर से अमेरिकियों को दी जाने वाली धमकियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
जानकारों के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच झड़पें तेज हो गईं। हालांकि, मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात अब युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गया है।
फिर भी, फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला संकरा जलमार्ग अभी भी चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अगर समझदारी से काम लिया जाए, तो अमेरिका और इजरायल हमला करने की कोशिश नहीं करेंगे।
यमन में सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच चल रही लड़ाई ने भी तेल की सप्लाई से जुड़े जोखिमों को बढ़ा दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया है। यह हमला सना में सऊदी अरब द्वारा किए गए हमलों के जवाब में किया गया था।
गौरतलब है कि तेल की ऊंची कीमतों का असर अमेरिकी शेयर बाजारों पर भी पड़ा। शुक्रवार को प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। इससे पहले, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े शेयरों के लिए हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, हालांकि बाद में टेक्नोलॉजी शेयरों में कुछ स्थिरता देखने को मिली थी।
एशियाई बाजारों में कारोबार काफी संभलकर हुआ, क्योंकि तेल की कीमतें अपने छह महीने के उच्चतम स्तर से नीचे आ गई हैं। निवेशक अब एक ऐसे हफ्ते के लिए तैयार हैं, जिसमें केंद्रीय बैंकों की बैठकें और कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं। ये घटनाएं AI-आधारित तेजी पर निवेशकों के भरोसे की परीक्षा ले सकती हैं।
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