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नई दिल्ली। घर खरीदने का सपना लेकर अपनी मेहनत की कमाई लगाने वाले एक खरीदार को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार राहत मिली है। फ्लैट का कब्जा समय पर नहीं मिलने और बिल्डर की ओर से देरी के बाद खरीदार ने कानूनी रास्ता अपनाया, जिसके बाद प्राधिकरण ने बिल्डर को रकम वापस करने का आदेश दिया। इस मामले में खरीदार को करीब **14 लाख रुपये से ज्यादा की राशि वापस** दिलाई गई।
रियल एस्टेट सेक्टर में फ्लैट की बुकिंग के बाद समय पर कब्जा नहीं मिलना एक बड़ी समस्या रही है। कई खरीदार सालों तक इंतजार करते रहते हैं, जबकि दूसरी तरफ उन्हें बैंक की EMI, किराया और अन्य खर्चों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में रेरा (RERA) और उपभोक्ता आयोग खरीदारों के अधिकारों की रक्षा के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं।
फ्लैट बुक किया, लेकिन नहीं मिला कब्जा
मामले के अनुसार, खरीदार ने एक आवासीय परियोजना में फ्लैट बुक किया था और इसके लिए बड़ी रकम का भुगतान किया। खरीदार को उम्मीद थी कि तय समय पर उसे अपने घर का कब्जा मिल जाएगा।
लेकिन समय बीतने के बाद भी बिल्डर फ्लैट का निर्माण पूरा नहीं कर पाया और न ही खरीदार को कब्जा सौंप सका। लगातार देरी के कारण खरीदार को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद खरीदार ने बिल्डर से पैसे वापस करने की मांग की, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर उसने रियल एस्टेट नियामक संस्था का दरवाजा खटखटाया।
प्राधिकरण ने बिल्डर की लगाई क्लास
मामले की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने पाया कि बिल्डर तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी करने में असफल रहा। खरीदार को अनिश्चित समय तक इंतजार कराने को उचित नहीं माना गया।
इसके बाद आदेश दिया गया कि खरीदार को उसकी जमा राशि वापस की जाए। साथ ही देरी के लिए ब्याज और अन्य राहत देने का भी निर्देश दिया गया।
ऐसे मामलों में रेरा कानून के तहत खरीदारों को अधिकार मिलता है कि अगर बिल्डर समय पर कब्जा देने में विफल रहता है तो वे परियोजना से बाहर निकलकर रिफंड की मांग कर सकते हैं।
खरीदारों के लिए बड़ा संदेश
यह मामला उन लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो बिल्डर से फ्लैट खरीदते हैं लेकिन समय पर कब्जा नहीं मिल पाता। अक्सर खरीदार यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि शायद जल्द ही प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बिल्डर लंबे समय तक देरी कर रहा है तो खरीदारों को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए।
खरीदार इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं—
* रेरा में शिकायत दर्ज करना
* उपभोक्ता आयोग में जाना
* देरी पर ब्याज और मुआवजे की मांग करना
* जमा राशि वापस लेने का विकल्प चुनना
बिल्डरों के लिए भी चेतावनी
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला बिल्डरों के लिए भी एक संदेश है कि ग्राहकों से किए गए वादों को पूरा करना जरूरी है।
फ्लैट बेचने के समय जो समय सीमा बताई जाती है, उसका पालन करना बिल्डर की जिम्मेदारी होती है। बिना उचित कारण के देरी होने पर खरीदारों को राहत मिल सकती है।
हाल के वर्षों में कई मामलों में रेरा और उपभोक्ता आयोगों ने देरी करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कई मामलों में खरीदारों को रिफंड के साथ ब्याज और मुआवजा भी दिलाया गया है।
घर खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी नया फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए—
1. प्रोजेक्ट की जांच करें
फ्लैट बुक करने से पहले देखें कि प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड है या नहीं।
2. बिल्डर का रिकॉर्ड देखें
पहले के प्रोजेक्ट समय पर पूरे हुए हैं या नहीं, इसकी जानकारी जरूर लें।
3. एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें
बिल्डर-बायर एग्रीमेंट में कब्जे की तारीख, देरी की स्थिति और मुआवजे से जुड़ी शर्तों को समझें।
4. सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें
पेमेंट रसीद, एग्रीमेंट और बिल्डर से हुई बातचीत का रिकॉर्ड संभालकर रखें।
रेरा ने मजबूत किया खरीदारों का भरोसा
रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी RERA लागू होने के बाद घर खरीदारों को पहले की तुलना में ज्यादा अधिकार मिले हैं। इसका उद्देश्य बिल्डरों की जवाबदेही बढ़ाना और खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।
अब अगर बिल्डर तय समय पर घर नहीं देता है तो खरीदार के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
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