
New Delhi नई दिल्ली : शेयर बाजार में पिछले एक साल के दौरान 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। वहीं दूसरी ओर गोल्ड मार्केट में भी लगातार उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) फिर से एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है।
बैंकों से लेकर NBFC तक इस समय एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें दी जा रही हैं, जिससे निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित रिटर्न की ओर बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की अनिश्चितता के बीच एफडी स्थिर और भरोसेमंद आय का साधन बनी हुई है।
खास बात यह है कि कुछ कंपनी एफडी स्कीम्स में निवेशकों को 9.1 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल रहा है। यह दर सामान्य बैंक एफडी की तुलना में अधिक मानी जा रही है, जिसके कारण निवेशकों में इन स्कीम्स को लेकर रुचि बढ़ी है।
कंपनी एफडी वह निवेश विकल्प होता है जिसमें कोई व्यक्ति किसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) या कॉर्पोरेट कंपनी में एक निश्चित अवधि के लिए पैसा जमा करता है और बदले में तय ब्याज प्राप्त करता है। यह एफडी बैंक एफडी की तरह ही काम करती है, लेकिन इसमें रिटर्न और जोखिम दोनों थोड़ा अलग हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनी एफडी में निवेश करने से पहले निवेशकों को कंपनी की क्रेडिट रेटिंग, वित्तीय स्थिति और विश्वसनीयता की जांच जरूर करनी चाहिए। अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों की एफडी अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं और इनमें डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है।
वर्तमान समय में जब शेयर बाजार अस्थिर है और सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी है, ऐसे में कई निवेशक सुरक्षित और स्थिर आय के विकल्प के रूप में एफडी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल अधिक ब्याज दर देखकर निवेश न करें, बल्कि जोखिम और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लें।
कुल मिलाकर, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में एफडी एक बार फिर निवेशकों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आई है, खासकर उन लोगों के लिए जो कम जोखिम के साथ स्थिर रिटर्न चाहते हैं।





