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IPO के नए इश्यू के आकार में 50% तक बदलाव कर सकेंगी कंपनियां

nidhi
14 Oct 2026 3:13 PM IST
IPO के नए इश्यू के आकार में 50% तक बदलाव कर सकेंगी कंपनियां
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IPO के नए इश्यू पर छूट
मुंबई: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कंपनियों को नई ड्राफ्ट फाइलें जमा किए बिना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के 'फ्रेश इश्यू' साइज़ में 50% तक बदलाव करने की छूट की समय-सीमा बढ़ा दी है।
एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) के अनुसार, नई डेडलाइन 31 मार्च, 2027 है, जो पहले 30 सितंबर, 2026 थी।
IPO लाने वाली कंपनियों के लिए ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी
यह छूट AIBI की उन बातों के बाद दी गई है जिनमें IPO प्रोसेस के दौरान फंड जुटाने की ज़रूरतों में बदलाव करते समय कंपनियों और मर्चेंट बैंकर्स को होने वाली दिक्कतों को बताया गया था।
सामान्य नियमों के तहत, अगर अनुमानित 'फ्रेश इश्यू' साइज़ में 20% से ज़्यादा का बदलाव होता है, तो कंपनियों को नए ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट फाइल करने होते हैं।
इस छूट के तहत रेगुलेटरी शर्तों के साथ 50% तक बदलाव की अनुमति है।
कंपनियों को किन शर्तों का पालन करना होगा?
कंपनियों को यह पक्का करना होगा कि उनके IPO के मूल उद्देश्य में कोई बदलाव न हो।
मर्चेंट बैंकर्स को बदलावों का कारण बताना होगा, ज़रूरी जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) करनी होगी, प्रॉस्पेक्टस में ज़रूरी जानकारी अपडेट करनी होगी और निवेशकों को जानकारी देने के लिए एक ऐडेंडम (पूरक जानकारी) पब्लिश करना होगा।
खास बात यह है कि यह छूट सिर्फ़ 'फ्रेश इश्यू' पर लागू होती है, जिसमें कंपनियां सीधे फंड जुटाती हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों से जुड़े 'ऑफर-फॉर-सेल' ट्रांज़ैक्शन शामिल नहीं हैं।
AIBI ने SEBI के फैसले का स्वागत किया
AIBI के चेयरमैन और पैंटोमैथ फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप के फाउंडर महावीर लुनावत ने कहा कि बदलती बिज़नेस ज़रूरतों और मार्केट की स्थितियों के कारण कंपनियों को अक्सर IPO साइज़ पर दोबारा सोचना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इस छूट से प्रोसेस से जुड़ी रुकावटें कम होंगी और साथ ही पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा भी बनी रहेगी।
IPO से फंड जुटाने का सिलसिला मज़बूत बना हुआ है
AIBI के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान 69 मेनबोर्ड IPO से 90,482 करोड़ रुपये जुटाए गए।
इसके अलावा, 92 SME IPO से 4,167 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिससे कुल जुटाई गई रकम 94,649 करोड़ रुपये हो गई।
ये आंकड़े IPO से मिलने वाली कुल रकम को दिखाते हैं और इन्हें पूरी तरह से इस छूट का नतीजा नहीं माना जा सकता।
ऑब्जर्वेशन लेटर की समय-सीमा बढ़ाने से अलग
SEBI ने शुरू में अप्रैल 2026 में वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ी मार्केट की अनिश्चितता के बीच यह छूट दी थी। इस नए एक्सटेंशन से IPO ऑब्ज़र्वेशन लेटर की वैलिडिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनियों को पब्लिक ऑफ़रिंग लॉन्च करने से पहले सभी लागू रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करना जारी रखना होगा।
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