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वेयरहाउस कोल्ड चेन की होगी ग्रेडिंग DPIIT तैयार कर रहा राष्ट्रीय मानक

Ratna Netam
29 Sept 2026 3:38 PM IST
वेयरहाउस कोल्ड चेन की होगी ग्रेडिंग DPIIT तैयार कर रहा राष्ट्रीय मानक
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नई दिल्ली। देश में वेयरहाउस और कोल्ड-चेन सुविधाओं की गुणवत्ता को एक समान मानकों पर परखने के लिए केंद्र सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के सहयोग से वेयरहाउस और कोल्ड-चेन सुविधाओं के लिए व्यापक ग्रेडिंग और रेटिंग स्टैंडर्ड का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इसका उद्देश्य पूरे देश में इन सुविधाओं के लिए एक समान बेंचमार्क बनाना और बेहतर गुणवत्ता वाली इकाइयों को पहचान देना है।FICCI की ओर से आयोजित तीसरे लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन समिट को संबोधित करते हुए DPIIT के जॉइंट सेक्रेटरी पंकज कुमार ने इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस बात पर भी विचार-विमर्श किया है कि नई ग्रेडिंग और रेटिंग व्यवस्था की निगरानी किस प्रकार की जाए और इसके लिए किस तरह का नियामक तंत्र सबसे प्रभावी होगा।
अधिकारियों ने एक औपचारिक सरकारी निगरानी संस्था स्थापित करने की संभावनाओं की तुलना ऐसे मॉडल से की है, जिसमें उद्योग स्वयं निर्धारित मानकों के आधार पर रेगुलेशन और अनुपालन की व्यवस्था संभाले। चर्चा में इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि प्रमाणित और बेहतर रेटिंग वाली वेयरहाउस तथा कोल्ड-चेन इकाइयों को भविष्य में राज्य सरकारों की प्रोत्साहन योजनाओं और संस्थागत ऋण तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।नई रेटिंग व्यवस्था के जरिए वेयरहाउसिंग सेक्टर में गुणवत्ता, सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और संचालन से जुड़े मानकों को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जाएगी। देश के अलग-अलग हिस्सों में वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की गुणवत्ता में अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में एक राष्ट्रीय बेंचमार्क से उद्योग, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों को किसी सुविधा की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
DPIIT पहले भी वेयरहाउसिंग सेक्टर में मानकीकरण को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। विभाग ने सितंबर 2022 में वेयरहाउसिंग स्टैंडर्ड पर ई-हैंडबुक भी जारी की थी। नई पहल इसी मानकीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में देखी जा रही है।रेटिंग सिस्टम का ब्लूप्रिंट विभाग की ओर से जारी वेयरहाउस स्टैंडर्ड्स और गाइडलाइंस के दो सेट पर आधारित है। इन मानकों का उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के निर्माण तथा संचालन में एक निश्चित स्तर की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय रेटिंग व्यवस्था के अलावा DPIIT का लॉजिस्टिक्स डिवीजन मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क्स यानी MMLPs के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है। इन पार्कों का उद्देश्य सड़क, रेल और दूसरे परिवहन साधनों को एक ही स्थान पर जोड़कर माल की आवाजाही और भंडारण को अधिक प्रभावी बनाना है।पंकज कुमार ने बताया कि MMLPs में वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाएं बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनका हिस्सा करीब 70 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि इन पार्कों को केवल सामान रखने या एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने वाली सुविधाओं तक सीमित न रखा जाए, बल्कि यहां कई प्रकार की वैल्यू-एडेड सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में प्रोडक्ट लेबलिंग, पैकेजिंग, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और क्षेत्रीय स्तर पर सामान के पुनर्वितरण जैसी सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। इससे कंपनियों को एक ही लॉजिस्टिक्स परिसर में सामान के भंडारण से लेकर पैकेजिंग और आगे वितरण तक की सुविधाएं मिल सकती हैं।डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को भी भविष्य के लॉजिस्टिक्स ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इससे कंपनियां अपने सामान की आवाजाही पर नजर रख सकेंगी और सप्लाई चेन में देरी या अन्य समस्याओं की पहचान जल्दी की जा सकेगी।
DPIIT की योजना राज्यों को शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स प्लान तैयार करने में मदद करने की भी है। तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स के कारण शहरों में डार्क स्टोर्स, छोटे वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शहरों की लॉजिस्टिक्स जरूरतों को शहरी योजना के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।नई गाइडलाइंस में डार्क स्टोर्स और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं को शहर स्तर की लॉजिस्टिक्स योजना में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिल सकती है कि ऐसी सुविधाएं कहां विकसित हों और उनके कारण स्थानीय यातायात तथा माल परिवहन को किस तरह व्यवस्थित किया जाए।
वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA) की व्यवस्था भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। WDRA का उद्देश्य वैज्ञानिक भंडारण को बढ़ावा देना और इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रिसीट के आधार पर किसानों तथा अन्य जमाकर्ताओं के लिए संस्थागत ऋण तक पहुंच आसान बनाना है।WDRA की ओर से साझा आंकड़ों में कमोडिटी के बदले मिलने वाली फाइनेंसिंग में भी तेजी का संकेत मिला है। इससे यह साफ होता है कि औपचारिक और रेगुलेटेड वेयरहाउसिंग व्यवस्था केवल भंडारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कारोबार और कृषि उत्पादों के लिए वित्त उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।कुल मिलाकर DPIIT और ADB की प्रस्तावित ग्रेडिंग एवं रेटिंग व्यवस्था का उद्देश्य देश के वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सेक्टर को अधिक मानकीकृत, पारदर्शी और निवेश के अनुकूल बनाना है। इसके साथ MMLP के लिए अलग गाइडलाइंस, डिजिटल ट्रैकिंग, पैकेजिंग और शहर स्तर की लॉजिस्टिक्स योजनाओं पर जोर देकर सरकार लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक आधुनिक और संगठित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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