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Coal इंडिया लिमिटेड ने गैर-विनियमित क्षेत्र को बढ़ाई कोयला आपूर्ति

Kavita2
5 Jun 2026 3:36 PM IST
Coal इंडिया लिमिटेड ने गैर-विनियमित क्षेत्र को बढ़ाई कोयला आपूर्ति
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Mumbai मुंबई : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने उद्योगों को अधिक परिचालन लचीलापन देने और गैर-विनियमित क्षेत्र (एनआरएस) उपभोक्ताओं को कोयला आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से कई नए उपायों की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश में कोयले की उपलब्धता में सुधार करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।

कंपनी ने एक बड़े कदम के तहत 12 जून, 2026 को होने वाली अपनी लिंकेज नीलामी विंडो में रिकॉर्ड 35 मिलियन टन (एमटी) उच्च ग्रॉस कैलोरिफिक वैल्यू (GCV) कोयले की पेशकश की है। यह अब तक की सबसे बड़ी पेशकशों में से एक मानी जा रही है, जो घरेलू कोयला आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सीआईएल के अनुसार यह बढ़ी हुई आपूर्ति विशेष रूप से स्पंज आयरन क्षेत्र को ध्यान में रखकर की गई है, जो अब तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले आयातित कोयले पर निर्भर रहा है। कंपनी का मानना है कि इस कदम से घरेलू उद्योगों को सस्ता और अधिक सुलभ ईंधन उपलब्ध होगा, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।

अधिकारियों ने बताया कि गैर-विनियमित क्षेत्र के उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर आपूर्ति व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और लचीला बनाया गया है। इससे उद्योगों को अपनी जरूरत के अनुसार कोयला प्राप्त करने में आसानी होगी और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं कम होंगी।

सीआईएल ने यह भी उम्मीद जताई है कि इस पहल से भारत की कोयला आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक बाजार में कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संकट के कारण घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाकर इस अस्थिरता से निपटने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल औद्योगिक क्षेत्र के लिए लाभकारी होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। घरेलू कोयले की अधिक उपलब्धता से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रगति होगी।

सीआईएल के इस निर्णय को सरकार की ऊर्जा नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश में घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना और आयात पर निर्भरता को क्रमिक रूप से कम करना है।

कुल मिलाकर, 35 मिलियन टन कोयले की रिकॉर्ड पेशकश भारत के कोयला बाजार में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है, जिससे उद्योगों को स्थिर आपूर्ति और लागत में राहत मिलने की उम्मीद है।

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